टोक्यो, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत और जापान ने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि वे एक स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर भी चर्चा की है और भविष्य में कई क्षेत्रों में मिलकर काम करने की योजना बनाई है।
यह बातचीत 22 से 24 अप्रैल के बीच जापान में हो रही आठवीं भारत-जापान आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता के दौरान हुई।
भारतीय सेना की एडिशनल डायरेक्टरेट जनरल ऑफ पब्लिक इंफॉर्मेशन (एडीजीपीआई) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि दोनों पक्षों के बीच उपयोगी चर्चा हुई। इसमें दोनों देशों के बीच चल रहे रक्षा सहयोग की समीक्षा की गई और भविष्य में अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बात हुई। दोनों देशों ने फिर से इस बात की पुष्टि की कि वे एक स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक के पक्ष में हैं। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ से भी मुलाकात की।
इससे पहले दस अप्रैल को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी से फोन पर बात की थी। इस बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति और खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर चर्चा हुई।
बातचीत के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, ”अपने समकक्ष से अच्छी बातचीत की और भारतीय नागरिकों की मौत पर संवेदना जताने के लिए उनका धन्यवाद किया।”
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बहुत ही अहम समुद्री रास्ता है, जो पर्शियन गल्फ को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
पिछले महीने भी जयशंकर ने फ्रांस में जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान अपने जापानी समकक्ष से मुलाकात की थी।
इसके अलावा छह मार्च को विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने जापान के प्रधानमंत्री के विशेष सलाहकार सदामासा ओए से मुलाकात की थी और रक्षा तकनीक और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने पर चर्चा की थी।

