Thursday, June 25, 2026
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    भारत प्रकृति-आधारित इनोवेशन के जरिए सतत जल प्रबंधन का कर सकता है नेतृत्व : एक्सपर्ट

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    डालियान (चीन), 25 जून (आईएएनएस)। भारत में प्रकृति से प्रेरित ऐसी तकनीकों को अपनाकर सतत जल प्रबंधन में वैश्विक नेतृत्व बनने की क्षमता है, जो ऊर्जा की खपत को कम करती हैं और पानी के दोबारा इस्तेमाल को बेहतर बनाती हैं। यह जानकारी एक्सपर्ट की ओर से दी गई।

    वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘एनुअल मीटिंग ऑफ द न्यू चैंपियंस’ (समर दावोस) के दौरान आईएएनएस से ​​बात करते हुए ईसीओएसटीपी टेक्नोलॉजी के सीईओ और संस्थापक भरथन ने कहा कि भारत में बढ़ते वेस्टवॉटर की चुनौती, घरेलू इनोवेशन के जरिए पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर असर डालने का एक मौका देती है।

    उन्होंने बताया कि देश का लगभग 80 प्रतिशत सीवेज बिना ट्रीट किए ही छोड़ दिया जाता है, जिससे नदियों, झीलों और पानी के अन्य स्रोतों में भारी प्रदूषण होता है।

    ईसीओएसटीपी टेक्नोलॉजीज ने बायोमिमिक्री से प्रेरित होकर वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट का एक तरीका विकसित किया है। यह एक ऐसी तकनीक है जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं की नकल करती है। कंपनी ने बिना बिजली, केमिकल या मैकेनिकल उपकरणों के इस्तेमाल के सीवेज को ट्रीट करने के लिए गाय के पेट के काम करने के तरीके को अपनाया है।

    भरथन के अनुसार, सीवेज ट्रीटमेंट के पारंपरिक सिस्टम काफी हद तक एअरेशन (हवा मिलाने की) प्रक्रियाओं पर निर्भर करते हैं, जिनमें बहुत अधिक ऊर्जा की खपत होती है और ऑपरेशन का खर्च भी ज्यादा आता है।

    इसके उलट, कंपनी का ग्रेविटी-बेस्ड सिस्टम खास तौर पर तैयार किए गए बैक्टीरिया और जमीन के नीचे बने चैंबर का इस्तेमाल करता है। ये चैंबर गाय के पेट के चार हिस्सों – रूमेन, रेटिकुलम, ओमासम और एबोमासम – की तरह काम करते हैं और गंदे पानी को प्राकृतिक तरीके से साफ करते हैं।

    यह टेक्नोलॉजी आईआईटी जम्मू के साथ मिलकर विकसित की गई है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि सीवेज को दोबारा इस्तेमाल लायक साफ पानी में बदला जा सके, और इसके लिए किसी ऑपरेटर, हिलने-डुलने वाले पार्ट्स या लगातार बिजली सप्लाई की जरूरत नहीं पड़ती। भरथन ने बताया कि कंपनी ने भारत भर में अपने सिस्टम के जरिए 9 अरब लीटर से अधिक गंदे पानी को साफ किया है।

    यह स्टार्टअप अभी 24 राज्यों में ग्राहकों को सेवा दे रहा है और इसने बांग्लादेश और मालदीव तक अपना कारोबार बढ़ाया है। कंपनी अफ्रीकी बाजारों – जैसे मोजाम्बिक और केन्या – में भी कदम रख रही है ताकि टिकाऊ वॉटर ट्रीटमेंट समाधान दे सके।

    भरथन ने कहा कि भारत में गंदे पानी की समस्या सिर्फ प्रशासन से जुड़ी बात नहीं है, बल्कि यह एक तकनीकी चुनौती भी है, क्योंकि मौजूदा ट्रीटमेंट सिस्टम अक्सर महंगे होते हैं और उनमें बहुत अधिक ऊर्जा लगती है। उन्होंने आगे कहा कि प्रकृति पर आधारित समाधान भारतीय परिस्थितियों के लिए खास तौर पर उपयुक्त हैं और ये पानी बचाने तथा पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।