नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। भारत का हथियार निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक के सबसे उच्च स्तर 3.56 बिलियन यूरो तक पहुंच गया है। यह साल 2024-25 में दर्ज 2.39 बिलियन यूरो से 63 फीसदी की वृद्धि है।
केंद्र सरकार के अनुसार, भारतीय रक्षा उपकरणों के प्रमुख बाजारों में अमेरिका, फ्रांस, मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स और आर्मेनिया शामिल हैं, जहां 145 भारतीय निर्यातक अब 80 से अधिक देशों को आपूर्ति कर रहे हैं।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंकड़ों का हवाला देते हुए, ऑस्ट्रिया स्थित सैन्य पत्रिका ‘मिलिटार एक्चुएल’ ने कहा कि भारत ने कम से कम 23 देशों को प्रमुख पारंपरिक हथियारों की आपूर्ति की है।
रिपोर्ट के अनुसार, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल भारत के रक्षा निर्यात अभियान का प्रमुख उत्पाद और सबसे ज्यादा बिकने वाला सिस्टम है। 2025 में पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिसाइलों की ‘शानदार सफलता’ ने अंतरराष्ट्रीय रुचि को बढ़ा दिया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्रह्मोस मिसाइल की कई बैटरियां फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया को डिलीवर की गई हैं और अकेले इन तीन ऑर्डर की कीमत एक बिलियन यूरो से अधिक आंकी गई है।
इसमें कहा गया, “अन्य महत्वपूर्ण रक्षा निर्यातों में आर्टिलरी सिस्टम और मोर्टार, रडार, फास्ट पेट्रोल बोट और गार्ड शिप, ध्रुव लाइट मल्टीपर्पज हेलीकॉप्टर और मोरक्को के लिए बख्तरबंद गाड़ियां, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और बॉडी आर्मर शामिल हैं। फिलहाल, फोकस एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर है। हालांकि, फ्रांस को पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर बेचने का प्रयास दर्शाता है कि भारत अब अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बाजारों में भी प्रतिस्पर्धा करने का लक्ष्य रखता है।”
जैसे-जैसे भारत और आर्मेनिया अपनी रक्षा साझेदारी को गहरा कर रहे हैं, दोनों देशों ने 16 और 17 अगस्त को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की दो दिवसीय येरेवन यात्रा के दौरान रक्षा अनुसंधान, विकास, नवाचार और संयुक्त उत्पादन में सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया, “रक्षा सहयोग की शुरुआत मार्च 2020 में ही लगभग 35 मिलियन यूरो मूल्य के चार स्वाति आर्टिलरी टोही रडार के अनुबंध के साथ हुई थी। इस प्रकार आर्मेनिया इस भारतीय प्रणाली का पहला विदेशी ग्राहक बना, जिसमें भारत ने रूसी और पोलिश आपूर्तिकर्ताओं को पछाड़ दिया। हालांकि, आगे के विकास के लिए असली उत्प्रेरक 2020 में 44 दिनों तक चला नागोर्नो-कराबाख युद्ध और उसके बाद रूस से आर्मेनिया का अलगाव था।”
पिछले हफ्ते, मेजर जनरल अलेक्जेंडर त्साकान्यन के नेतृत्व में आर्मेनियाई सशस्त्र बलों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिमी वायु कमान के तहत भारतीय वायु सेना के एक स्टेशन का दौरा किया और परिचालन और रखरखाव सुविधाओं का दौरा किया था।
