नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। भारत वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस को खत्म करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम’ के तहत जांच, मुफ्त परीक्षण और इलाज की सुविधाओं का लगातार विस्तार कर रहा है। साथ ही, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में आने वाली बाधाओं को भी व्यवस्थित तरीके से दूर किया जा रहा है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम को कई अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जोड़ा गया है, ताकि संक्रमण की रोकथाम की जा सके और संक्रमित लोगों को मुफ्त जांच, दवाएं और इलाज की सुविधा मिल सके।
साल 2018 में शुरू किए गए राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत लोगों की जांच और इलाज की सुविधा दी जाती है। यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को खत्म करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
बयान में कहा गया है, “राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत संक्रमण की रोकथाम, लोगों में जागरूकता बढ़ाने और बेहतर इलाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही, स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान बनाने और जरूरतमंद सभी लोगों को वायरल हेपेटाइटिस की मुफ्त जांच और इलाज उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।”
इस कार्यक्रम में हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई से जुड़े मामलों को शामिल किया गया है। मरीजों के पंजीकरण, इलाज और निगरानी के लिए कागज रहित राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम प्रबंधन सूचना पोर्टल का इस्तेमाल किया जाता है।
हेपेटाइटिस ए और ई आमतौर पर तेजी से फैलने वाले संक्रमण हैं, जिनमें लोगों में जल्दी लक्षण दिखाई देते हैं और कई बार इनके प्रकोप भी देखने को मिलते हैं। इनकी निगरानी एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के तहत की जाती है।
हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी से संक्रमित जरूरतमंद सभी लोगों को मुफ्त जांच, दवाएं और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकार ने वर्ष 2021 के एचआईवी निगरानी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जांच में शामिल लोगों में लगभग 0.85 प्रतिशत लोग हेपेटाइटिस बी और 0.29 प्रतिशत लोग हेपेटाइटिस सी से संक्रमित पाए गए। यानी औसतन हर 118 लोगों में एक व्यक्ति हेपेटाइटिस बी और हर 345 लोगों में एक व्यक्ति हेपेटाइटिस सी से संक्रमित था।
सरकार प्रजनन और मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत सभी गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस बी की जांच कराने की व्यवस्था भी कर रही है।
सभी नवजात शिशुओं को हेपेटाइटिस बी की बर्थ डोज़ और पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं के नवजात शिशुओं को हेपेटाइटिस बी इम्युनोग्लोबुलिन (एचबीआईजी) मिलना पक्का करने के लिए सरकार यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के साथ-साथ जन्म के 24 घंटे के अंदर हेपेटाइटिस बी की बर्थ डोज देने में मदद करती है।
इस कार्यक्रम के लिए 1800-11-6666 टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध है, जिसे राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के साथ साझा किया गया है। इस नंबर पर लोग संक्रमण, उससे बचाव, उसके फैलने के तरीके, इलाज और देशभर में इस कार्यक्रम के तहत उपलब्ध जांच एवं उपचार केंद्रों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

