Friday, June 5, 2026
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विश्व पर्यावरण दिवस: केंद्रीय मंत्री गिरिराज बोले, भारत में प्रति व्यक्ति ग्रीन कवर की कमी है

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नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत देश में एनडीए नेताओं द्वारा वृक्षारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं।

इस मौके पर केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने चेतावनी दी कि देश में अभी प्रति व्यक्ति हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) में ’11 प्रतिशत की कमी’ है।

गिरिराज सिंह ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री मोदी लगातार ‘एक पेड़ मां के नाम’ का संदेश दे रहे हैं। अभी हमारे यहां प्रति व्यक्ति हरित क्षेत्र (जो पर्यावरण की स्थिरता के लिए जरूरी है) में 11 प्रतिशत की कमी है।”

उन्होंने कहा, “आदर्श रूप से, 0.05 हेक्टेयर जमीन पर पेड़ होने चाहिए, लेकिन हम अभी भी उस लक्ष्य से पीछे हैं।”

उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी पहले भी ‘मिशन अमृत सरोवर’ के जरिए जल संरक्षण की बात कर चुके हैं।

इसके अलावा, उन्‍होंने कार्बन उत्सर्जन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाया। उन्‍होंने कहा कि पीएम मोदी ‘पीएम सूर्य’ जैसी पहलों के जरिए रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, “सामाजिक वानिकी के तहत हम लोगों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाने का आग्रह कर रहे हैं।”

इस बीच, दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में एक बाजार का दौरा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “सरकार ने कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए मुझे यह जमीन दी थी। अब हम यहां कारीगरों को स्टॉल उपलब्ध करा रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “हम पुरस्कार विजेता कारीगरों और अन्य कुशल शिल्पकारों के उत्पादों को भी प्रदर्शित करते हैं, और बिक्री से होने वाली कमाई सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।”

गिरिराज सिंह ने कहा कि उनका लक्ष्य देश में ऐसा माहौल बनाना है, जहां कारीगरों के बच्चे भी इस हुनर ​​को अपना सकें और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकें। उनके शिल्प की मार्केटिंग के लिए पीएम मोदी ने उन्हें ई-मार्केटिंग के जरिए विदेशों से जोड़ा है।

केंद्रीय मंत्री ने अपने मंत्रालय की ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स’ (ईपीसीएच) का भी जिक्र किया, जो कारीगरों को ट्रेड फेयर, ग्लोबल पैविलियन और ई-मार्केटिंग के जरिए अमेरिका स्थित ग्राहकों को अपने उत्पाद बेचने में मदद करती है।

उन्होंने कहा, “यहां कारीगरों के उत्पादों की तस्वीरें ली जाती हैं और ई-मार्केटिंग के जरिए विदेशों में बेची जाती हैं।”