नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) केरलम के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार को कहा कि एलन मस्क का स्टारलिंक एक हाल के समय में आया एक अच्छा इनोवेशन है लेकिन भारत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और लोगों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
स्टारलिंक विवाद पर आईएएनएस से बात करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि एक ट्वीट या एक पोस्ट से सरकार की पॉलिसी बनाने की प्रक्रिया नहीं बदलती।
चंद्रशेखर ने विस्तार से बताया, “कोई एक कारोबारी सरकार पर अपने लक्ष्यों, उद्देश्यों, जरूरी कामों या प्राथमिकताओं को बदलने के लिए दबाव नहीं डाल सकता। भले ही एलन दुनिया के सबसे होनहार जीनियस और सबसे सफल भविष्यवादी कारोबारियों में से एक हैं और उनका स्टारलिंक निश्चित रूप से एक बेहतरीन कंपनी और हाल के समय का सबसे बड़ा मोबिलिटी इनोवेशन है, फिर भी भारत सरकार को वही करना होगा जो उसकी जिम्मेदारी है – यानी अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, अपनी संप्रभुता और अपने लोगों की रक्षा करना।”
भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस शुरू करने के लिए अभी गृह मंत्रालय (एमएचए) से सिक्योरिटी मंजूरी का इंतजार है और सभी सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियां रेगुलेटरी प्रोसेस में एक ही स्टेज पर हैं।
चंद्रशेखर के अनुसार, टेक सेक्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार जिन सिद्धांतों पर काम करती है, वे 2021 में बनाए गए एक फ्रेमवर्क का हिस्सा हैं।
उन्होंने आईएएनएस को बताया, “सिद्धांत यह है कि टेक्नोलॉजी सभी के लिए खुली और सुलभ होनी चाहिए और सभी के द्वारा इस्तेमाल की जानी चाहिए। मुझे लगता है कि एलन मस्क का कहना है कि न केवल उनकी कंपनी स्टारलिंक, बल्कि इन मंजूरियों के लिए अप्लाई करने वाली अन्य तीन कंपनियों को भी मंजूरी मिलने में जो देरी हो रही है, उसके पीछे किसी तरह का प्रतिस्पर्धात्मक हित है।”
उन्होंने कहा कि यह बात बिल्कुल सच नहीं है।
चंद्रशेखर ने कहा, “मुझे लगता है कि सरकार ने अपनी बात कह दी है। मैं सरकार नहीं हूं। लेकिन असल बात यह है कि सैटेलाइट टेक्नोलॉजी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बिल्कुल अलग तरह की चुनौती पेश करती है। अभी जो सिक्योरिटी क्लीयरेंस की प्रक्रिया चल रही है, उसमें हर प्रोवाइडर और हर आवेदक की सुरक्षा और भरोसे से जुड़े मुद्दों की बारीकी से जांच की जाएगी। और सरकार यही कर रही है। मुझे लगता है कि इसके लिए सब्र की जरूरत है, जल्दबाजी की नहीं।”
उन्होंने बताया कि उन्होंने छह साल तक अमेरिका में काम किया और वे एच-1बी और ग्रीन कार्ड प्रोसेस का फायदा उठाने वालों में से एक थे। अमेरिका इस प्रोसेस का इस्तेमाल दुनिया भर के टैलेंट को अपनी इकॉनमी और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में शामिल होने के लिए बुलाने के लिए करता है।
चंद्रशेखर ने कहा, “किसी के भी मन में, यहां तक कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन के मन में भी, इस बात को लेकर कोई शक नहीं है कि टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अमेरिका की लीडरशिप को आगे बढ़ाने में भारतीय टैलेंट ने अहम भूमिका निभाई है। साथ ही, मुझे लगता है कि वे यह बात रख रहे हैं कि कुछ कंपनियों (भारतीय और अमेरिकी दोनों) ने इस एच-1बी वीजा प्रोसेस का गलत इस्तेमाल किया है और इसी वजह से उन पर रोक लगाई जा रही है।”
क्या इससे किसी को फायदा होगा?
उन्होंने कहा, “जाहिर है, अमेरिकी सरकार अपनी समझदारी से उन लोगों को अमेरिका में आने से रोकेगी जो इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन कुल मिलाकर, अमेरिकी इकॉनमी को भारतीय टैलेंट की जरूरत है और भारतीय टैलेंट अमेरिकी मौकों की तलाश में रहता है।”
