Monday, June 15, 2026
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सिक्किम के सीमावर्ती इलाकों में संचार को मजबूती देने के लिए सेना ने शुरू किया कम्युनिटी रेडियो स्टेशन

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गंगटोक, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय सेना ने दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में संचार व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए पूर्वी सिक्किम में बॉर्डर विलेज कम्युनिटी रेडियो स्टेशन 8.4 एफएम ‘रेडियो सिक्किम सुंदरी स्थापित किया है। सेना के अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

त्रिशक्ति कोर की ओर से शुरू की गई इस पहल का मकसद ऊंचे पहाड़ी इलाकों में जानकारी की कमी को दूर करना है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को अक्सर भौगोलिक रूप से अलग-थलग रहने, खराब मौसम और मोबाइल-इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

सिक्किम के लोगों को समर्पित यह पहला कम्युनिटी रेडियो स्टेशन, भरोसेमंद और समय पर जानकारी पहुंचाने का एक अहम जरिया बनेगा। यह स्टेशन स्थानीय खबरें, मौसम की जानकारी और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रसारित करेगा, ताकि दूर-दराज के सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोग हमेशा सूचित और जुड़े रहें।

जानकारी पहुंचाने के अलावा इस रेडियो स्टेशन से इलाके की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है। स्थानीय परंपराओं, संगीत और सामुदायिक मुद्दों पर आधारित कार्यक्रम प्रसारित किए जाएंगे, जो स्थानीय लोगों की आवाज को एक मंच देंगे और उनमें अपनी पहचान व जुड़ाव की भावना को मजबूत करेंगे।

खास बात यह है कि इस पहल का मकसद स्थानीय युवाओं को कंटेंट बनाने और प्रसारण के काम में शामिल करके उन्हें सशक्त बनाना भी है। इस जुड़ाव से उनके बातचीत करने के कौशल में सुधार होने, सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा मिलने और सीखने व विकास के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

इस स्टेशन का उद्घाटन सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों की मौजूदगी में किया गया। अधिकारियों ने बताया कि यह रेडियो स्टेशन कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता और सामुदायिक विकास से जुड़े ऐसे कार्यक्रम प्रसारित करेगा, जो स्थानीय आबादी की जरूरतों के हिसाब से तैयार किए गए होंगे।

सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह पहल अलग-थलग पड़े समुदायों को जोड़ने, स्थानीय आवाजों को बुलंद करने और दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देने में मददगार साबित होगी।

इसकी शुरुआत ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ (अंतिम छोर तक संपर्क) को मजबूत करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों में नागरिक समुदायों की मदद करने में सेना की भूमिका को और सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम पड़ाव है।