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    भारत की अर्थव्यवस्था एक दशक में दोगुनी होकर 8 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकती है: रिपोर्ट

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    नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था अगले एक दशक में दोगुनी होकर 8 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकती है। वैश्विक निवेश फर्म केकेआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि संरचनात्मक सुधारों, बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश और अर्थव्यवस्था के औपचारिककरण ने देश की विकास क्षमता को मजबूत किया है और यह वैश्विक निवेशकों के लिए बड़े अवसर पैदा कर रहा है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत पहले ही 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का आंकड़ा पार कर चुका है और मौजूदा आर्थिक गति को देखते हुए अगले 10 वर्षों में दोबारा अपने आकार को दोगुना करने की राह पर है।

    केकेआर ने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां लंबे समय तक लगातार लागू किए गए सुधारों का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट में कहा गया, “भारत इस बात का सबसे स्पष्ट उदाहरण है कि धैर्यपूर्वक किए गए संरचनात्मक सुधार तिमाही नहीं, बल्कि पूरे दशक में कितना बड़ा बदलाव ला सकते हैं।”

    रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2014 के बाद लागू किए गए कई प्रमुख आर्थिक सुधारों ने देश की विकास क्षमता को बढ़ाया है। इनमें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), श्रम बाजार का औपचारिककरण, डिजिटलीकरण और बुनियादी ढांचा विकास में बड़े निवेश शामिल हैं।

    केकेआर का मानना है कि ये सुधार भारत को लगभग 11 प्रतिशत नॉमिनल जीडीपी वृद्धि के मार्ग पर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, अब भी पहले से लागू कई सुधारों का पूरा लाभ अर्थव्यवस्था को मिलना बाकी है। इसलिए भारत की ग्रोथ स्टोरी अपने अंतिम चरण में नहीं पहुंची है, बल्कि इसमें आगे भी उल्लेखनीय संभावनाएं मौजूद हैं।

    केकेआर ने कहा कि औपचारिक अर्थव्यवस्था का विस्तार होने से भारतीय कारोबारों और नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) से जुड़ा जोखिम प्रीमियम कम हुआ है, जिससे लंबी अवधि के निवेश और विकास के लिए अधिक अनुकूल माहौल बना है।

    प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर टिप्पणी करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) भारतीय आईटी सेवा उद्योग के लिए खतरा नहीं, बल्कि एक नए अवसर के रूप में उभर सकता है। भारतीय आईटी कंपनियां अपनी सेवाओं में एआई का अधिक उपयोग कर सकती हैं, जिससे उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता दोनों बढ़ सकती हैं।

    रिपोर्ट ने यह भी कहा कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) भारत की आर्थिक वृद्धि के नए इंजन बनकर उभर रहे हैं। पारंपरिक आईटी सेवाओं के साथ-साथ जीसीसी क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने वैश्विक संचालन केंद्र स्थापित कर रही हैं।

    केकेआर के अनुसार, सेवा क्षेत्र पहले से ही भारत की रियल जीडीपी वृद्धि में आधे से अधिक योगदान दे रहा है और आने वाले वर्षों में इसकी भूमिका और मजबूत हो सकती है।