नई दिल्ली, 27 सितंबर (आईएएनएस)। भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) भारत-जीसीसी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के जरिए द्विपक्षीय व्यापार की पूरी क्षमता को खोलने पर काम कर रहे हैं। इस पर दोनों पक्षों के बीच पिछले सप्ताहांत न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर चर्चा हुई।
व्यापार वार्ता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और खाड़ी देशों के अधिकारियों के बीच हुई, जिनमें सऊदी अरब के विदेश मामलों के राज्य मंत्री आदेल अल-जुबैर और जीसीसी के महासचिव जासेम मोहम्मद अलबुदैवी शामिल थे।
अरब न्यूज में छपे एक लेख के अनुसार, 2025-26 वित्तीय वर्ष में जीसीसी-भारत द्विपक्षीय व्यापार 178 अरब डॉलर से अधिक का था और खाड़ी क्षेत्र में लगभग 1 करोड़ भारतीय प्रवासी भी रहते हैं।
जीसीसी सचिवालय ने एक बयान में कहा, “जीसीसी और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता शुरू होना आर्थिक और निवेश के दायरे को व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”
बैठक के दौरान अलबुदैवी ने ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, नवाचार और डिजिटल परिवर्तन सहित विभिन्न क्षेत्रों में ‘सहयोग को गहरा करने की अनिवार्यता पर भी जोर दिया।
भारत का पहले से ही ओमान और यूएई, जो दोनों जीसीसी के सदस्य हैं, के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) है। लेख में कहा गया है कि जीसीसी के साथ मुक्त व्यापार समझौते से दिल्ली को फायदा होने की संभावना है, जिससे भारतीय निर्यात के लिए बेहतर बाजार पहुंच, आपूर्ति शृंखलाओं के साथ गहरा एकीकरण और भारतीय सेवाओं व कुशल पेशेवरों के लिए अधिक अवसर मिलेंगे।
इसमें आगे कहा गया है कि जहां भारत के मशीनरी, कपड़ा, रत्न और आभूषण उद्योगों को पारंपरिक रूप से एफटीए से लाभ होता है, वहीं खाड़ी क्षेत्र के मामले में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों के साथ-साथ सेवा क्षेत्र जैसे अन्य क्षेत्रों को भी अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
जीसीसी भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार समूहों में से एक है। व्यक्तिगत देश के स्तर पर भी, यूएई तीसरे और सऊदी अरब भारत के वैश्विक व्यापारिक साझेदारों में पांचवें स्थान पर है। लेख में कहा गया है कि एफटीए से इस आर्थिक संबंध को और आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।
