चेन्नई, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने गुरुवार को कहा कि 30 सितंबर 2026 तक 59.20 गीगावाट की स्थापित क्षमता के साथ भारत 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता का आंकड़ा पार करने की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। इससे पवन ऊर्जा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने के लिए मजबूत आधार तैयार हो रहा है।
यहां ‘विंडएनर्जी इंडिया 2026’ के 8वें संस्करण का उद्घाटन करते हुए मंत्री ने देश में पवन ऊर्जा की अपार संभावनाओं और इससे मिलने वाले व्यापक अवसरों का जिक्र किया।
उन्होंने कहा, “भारत के पवन ऊर्जा क्षेत्र ने मजबूत गति दिखाई है। वित्त वर्ष 2026 में 6.05 गीगावाट की अब तक की सबसे अधिक वार्षिक क्षमता वृद्धि दर्ज की गई है। हमें पूरा विश्वास है कि वित्त वर्ष 2027 में वार्षिक पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि इस रिकॉर्ड को पार कर जाएगी। यह भारत की पवन ऊर्जा यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।”
मंत्री ने कहा, “यह निरंतर वृद्धि 2030 तक 100 गीगावाट की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करने के हमारे राष्ट्रीय लक्ष्य की नींव को और मजबूत करेगी तथा भारत के पवन ऊर्जा क्षेत्र के विकास को और गति देगी। मजबूत परियोजना पाइपलाइन और अनुकूल नीतिगत ढांचे के साथ भारत इस गति को आगे बढ़ाने और पवन ऊर्जा विकास के अगले चरण के लिए आवश्यक पैमाना हासिल करने की बेहतर स्थिति में है।”
इस अवसर पर भारत सरकार और कई राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, पवन ऊर्जा संघों के प्रतिनिधि तथा उद्योग जगत के प्रमुख लोग भी मौजूद रहे।
‘विंडएनर्जी इंडिया 2026’ वैश्विक पवन ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों को एक साझा मंच पर ला रहा है। इसमें 20 से अधिक देशों के करीब 400 प्रदर्शक, 500 प्रतिनिधि और डेनमार्क, जर्मनी तथा स्पेन के लिए समर्पित देश-विशेष पवेलियन शामिल हैं।
इस कार्यक्रम में भारतीय पवन ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने के लिए कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और घरेलू समझौतों की घोषणा की गई। इनमें आईडब्ल्यूटीएमए-बीडब्ल्यूई ग्लोबल समझौता ज्ञापन (एमओयू), आईडब्ल्यूटीएमए-पीटीबी आशय पत्र (एलओआई) और आईडब्ल्यूटीएमए-ओईसीडी सहयोग शामिल हैं। इसके अलावा, उद्घाटन समारोह के दौरान “तमिलनाडु में ऊर्जा परिवर्तन” और “भारतीय पवन ऊर्जा क्षेत्र के लिए संविदात्मक व्यवस्था पर नए सिरे से विचार” शीर्षक वाली रिपोर्ट जारी की गईं।
