नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हमलों से ऐसी परिस्थितियां बन सकती हैं, जिनका फायदा आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) लंबे समय तक उठा सकता है। एक रिपोर्ट में शनिवार को यह चेतावनी दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि ईरान में अस्थिरता बढ़ती है तो इसके असर केवल देश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक सुरक्षा पर भी पड़ सकते हैं।
इंडिया नैरेटिव के लिए लिखते हुए कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग विशेषज्ञ पीटर क्नूपे ने कहा कि 2003 में अमेरिका के इराक पर हमले के बाद अप्रत्यक्ष रूप से दाएश (आईएसआईएस) जैसे संगठनों के उभरने का रास्ता बना था। उन्होंने कहा कि इराक में सत्ता संतुलन बदलने के खिलाफ सुन्नी विरोध ने दुनिया भर से विदेशी लड़ाकों को आकर्षित किया था।
उन्होंने कहा कि तथाकथित खिलाफत भले खत्म हो चुकी हो, लेकिन उसके निशान अब भी पश्चिम एशिया, अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में मौजूद हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या मौजूदा हालात दाएश और जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन जैसे संगठनों के दोबारा उभार का कारण बन सकते हैं।
क्नूपे के मुताबिक, हथियारों का प्रसार, कमजोर शासन व्यवस्था, जनता में असंतोष, मानवाधिकार उल्लंघन, दमन और अवसरवादी माहौल ऐसे कारक हैं, जो चरमपंथी संगठनों के पनपने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में आतंकी संगठन लोगों के गुस्से का फायदा उठाकर भर्ती और हिंसा को बढ़ावा देते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान में बढ़ते तनाव और पहचान आधारित ‘हम बनाम वे’ जैसी स्थिति आईएसकेपी नेतृत्व के लिए अवसर बन सकती है। इससे शिया समुदायों, संस्थानों और व्यक्तियों पर लक्षित हमलों का खतरा बढ़ सकता है।

