न्यूयॉर्क, 21 सितंबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस हफ्ते होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के हाई-लेवल सेशन में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंच गए हैं। उनका कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है। इस दौरान वह यहां पहुंच रहे अलग-अलग देशों के नेताओं के साथ कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें करेंगे।
न्यूयॉर्क पहुंचने पर वरिष्ठ भारतीय राजनयिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनका स्वागत किया। जयशंकर का शनिवार को दोपहर के सत्र में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने का कार्यक्रम है। यह सत्र स्थानीय समय के मुताबिक दोपहर तीन बजे शुरू होगा, जो भारत में रविवार रात 12:30 बजे होगा।
अपने संबोधन में जयशंकर दुनिया के सामने मौजूद अलग-अलग मुद्दों पर भारत का नजरिया रखेंगे। साथ ही वह सालाना हाई-लेवल बैठक के लिए जुटे संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों के नेताओं के सामने भारत की प्राथमिकताओं और चिंताओं को भी रखेंगे।
मंगलवार से शुरू होने वाले हाई-लेवल सेशन से पहले और उसके दौरान जयशंकर अलग-अलग देशों के नेताओं, विदेश मंत्रियों और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
इनमें कुछ बैठकें दो देशों के बीच सीधे तौर पर होंगी, जबकि कुछ अलग-अलग बहुपक्षीय मंचों पर होंगी। इसके अलावा कई अनौपचारिक मुलाकातें भी होने की उम्मीद है।
कुछ बैठकों में ग्लोबल साउथ के कई देशों के लिए भारत के सहायता कार्यक्रमों पर भी बात हो सकती है। भारत ये कार्यक्रम सीधे तौर पर और संयुक्त राष्ट्र तथा दूसरी बहुपक्षीय संस्थाओं के जरिए चलाता है।
जयशंकर को अपनी बैठकों के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता के लिए समर्थन जुटाने का भी मौका मिलेगा। इसके लिए चुनाव अगले साल होना है और चुने जाने वाले देश का दो साल का कार्यकाल 2028 से शुरू होगा।
इस दौरान वह भारत के 6-पॉइंट घोषणापत्र ‘शान्तु’ के बारे में भी बता सकते हैं। शान्तु का पूरा नाम ‘सिक्योरिंग होलिस्टिक एडवांसमेंट थ्रू नॉर्म्स, ट्रस्ट एंड इन्टीग्रिटी’ है। आसान शब्दों में इसका मतलब नियमों, भरोसे और ईमानदारी के जरिए सभी क्षेत्रों में विकास को सुरक्षित करना है।
न्यूयॉर्क में जयशंकर के कार्यक्रम में 26 सितंबर को एशिया सोसाइटी में होने वाला एक कार्यक्रम भी शामिल है।
बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा सत्र के अध्यक्ष हैं।
पिछले साल के हाई-लेवल सेशन के दौरान जयशंकर ने 47 द्विपक्षीय बैठकें की थीं और 10 बहुपक्षीय बैठकों में हिस्सा लिया था। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न देशों के नेताओं के साथ दर्जनों अनौपचारिक मुलाकातें भी की थीं। यह जानकारी उन्होंने उस व्यस्त सप्ताह को याद करते हुए अपनी एक फेसबुक पोस्ट में दी थी।
