विजयपुरा, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बीवाई विजयेंद्र ने राज्य सरकार द्वारा नारायणपुर जलाशय से तेलंगाना को लगभग दो टीएमसी पानी छोड़े जाने की कथित कार्रवाई पर आपत्ति जताई है।
शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए विजयेंद्र ने कहा कि ऐसे समय में जब कर्नाटक के कई हिस्सों में किसान और आम लोग पानी की कमी का सामना कर रहे हैं तो राज्य के हितों पर पर्याप्त विचार किए बिना पानी छोड़ने का निर्णय अनुचित है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तेलंगाना में भी कांग्रेस की सरकार होने के कारण कर्नाटक के किसानों के हितों से समझौता किया जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि पानी छोड़ने की अनुमति किसने दी और यह निर्णय किस आधार पर लिया गया है।
उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में लोगों और पशुओं के लिए पीने के पानी की कमी को देखते हुए सरकार को पारदर्शी जानकारी प्रदान करनी चाहिए और किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के संबंध में फॉर्म-7 आवेदन जमा करने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके डराने-धमकाने का माहौल बनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया से जमा किए गए आवेदनों को राजनीतिक कारणों से आपराधिक कृत्य के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसी चालों से नहीं डरेगी और पार्टी को कांग्रेस सरकार को गिराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जनता खुद ही उसकी विफलताओं के लिए उसे जिम्मेदार ठहराएगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से राजनीतिक दबाव से ध्यान हटाने के लिए विपक्ष को दोष देने के बजाय शासन पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी गारंटी योजनाओं के लिए धन जुटाने में संघर्ष कर रही है और इससे गरीब वर्गों के लिए मिलने वाले लाभ प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने बीपीएल राशन कार्डों को रद्द करना, विकलांगता पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों में देरी, दूध उत्पादकों के लिए लंबित प्रोत्साहन और पात्र गरीब परिवारों को घर उपलब्ध कराने में अपर्याप्त प्रगति को सरकार की विफलताओं के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
उन्होंने दक्षिण कन्नड़ में 32,000 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं की घोषणा के बाद सामने आई वित्तीय चिंताओं की खबरों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी की शिकायतें भी सामने आई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने बड़ी परियोजनाओं की घोषणा से पहले पर्याप्त वित्तीय व्यवस्था की थी।
विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) को लंबित भुगतान न करने से परिवहन उपक्रम पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि निगम पर ईंधन आपूर्तिकर्ताओं का बकाया है, जिससे बस संचालन और यात्री सेवाओं को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
