Tuesday, June 23, 2026
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कर्नाटक सीएम श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र में वोटों की पुनर्गणना में ‘मत चोरी’ का आरोप लगाया

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बेंगलुरु, 5 मई (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार को श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र में चुनावी धांधली के गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि डाक मतपत्रों के प्रबंधन और मतगणना में ‘आपराधिक साजिश’ रची गई थी।

श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र में 2023 के विधानसभा चुनावों के डाक मतपत्रों का पुनर्सत्यापन और पुनर्गणना उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद की गई थी। पुनर्गणना के बाद, भाजपा उम्मीदवार ने मौजूदा कांग्रेस विधायक को हरा दिया।

अपने आधिकारिक आवास ‘कृष्णा’ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार टीडी राजेगौड़ा ने मूल रूप से 201 वोटों के अंतर से 201 वोटों से जीत हासिल की थी, उन्हें 59,171 वोट मिले थे जबकि भाजपा उम्मीदवार डीएन जीवराज को 58,970 वोट मिले थे।

उन्होंने बताया कि राजेगौड़ा को मिले कुल वोटों में से 58,602 वोट ईवीएम के माध्यम से और 569 वोट डाक मतपत्रों के माध्यम से आए, जबकि जीवराज को 58,278 ईवीएम वोट और 692 डाक मतपत्र मिले।

उन्होंने कहा कि उस समय इन सभी वोटों को वैध घोषित कर दिया गया था और चुनाव अधिकारियों एवं मतगणना एजेंटों ने परिणामों पर हस्ताक्षर कर दिए थे।

हालांकि, अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जीवराज द्वारा कर्नाटक उच्च न्यायालय में दायर याचिका के बाद, न्यायालय ने 6 मार्च को वोटों की पुनः गणना का आदेश दिया।

सिद्धारमैया ने कहा कि पुनः गणना से डाक मतपत्रों के आंकड़े पूरी तरह से बदल गए।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुनः गणना में राजेगौड़ा के केवल 314 डाक मतों को वैध माना गया, जबकि 255 को अवैध घोषित कर दिया गया। दूसरी ओर, जीवराज को 690 डाक मत प्राप्त हुए। यह स्पष्ट रूप से आपराधिक साजिश और सुनियोजित वोट चोरी की ओर इशारा करता है।

उन्होंने आगे दावा किया कि राजेगौड़ा के पक्ष में डाले गए लगभग 250 वोटों के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सरासर वोटों की चोरी है।

सिद्धारमैया ने बताया कि मतगणना के बाद सभी चुनावी रिकॉर्ड सीलबंद करके बक्सों में रखे जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय राज्य और केंद्र दोनों में सत्ता में रही भाजपा ने मतपत्रों में हेराफेरी करने के लिए अधिकारियों का दुरुपयोग किया होगा।

उन्होंने कहा कि यह सब उनकी तथाकथित ‘डबल इंजन सरकार’ के शासनकाल में हुआ। मतपत्रों में हेरफेर में कर्मचारियों की संलिप्तता स्पष्ट है। यह एक आपराधिक साजिश है।