बेंगलुरु, 25 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार राज्य में बारिश की कमी (रेनफॉल डेफिसिट) से निपटने के लिए क्लाउड सीडिंग (बादलों से कृत्रिम वर्षा) की तैयारी तेज कर रही है। जल संसाधन मंत्री एन चेलुवरायस्वामी ने मंगलवार को कहा कि अगले दो दिनों के भीतर इस अभियान की शुरुआत की जा सकती है।
मंत्री ने बताया कि इस कार्यक्रम की निगरानी, तकनीकी मार्गदर्शन और मूल्यांकन के लिए मंगलवार की शाम तक तीन समितियों का गठन किया जाएगा।
विधान सौधा में आयोजित प्रेस वार्ता में चेलुवरायस्वामी ने कहा कि इस संबंध में दो बैठकें पहले ही हो चुकी हैं और विभागीय सचिवों को प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि मॉनिटरिंग कमेटी, टेक्निकल कमेटी और फील्ड ऑपरेशन एवं इवैल्यूएशन कमेटी बनाई जाएंगी। मॉनिटरिंग कमेटी की निगरानी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव करेंगे, जबकि टेक्निकल कमेटी में आईआईटी, आईआईएससी और भारतीय मौसम विभाग के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
मंत्री ने बताया कि कर्नाटक में पहले भी तीन बार क्लाउड सीडिंग की जा चुकी है, जिसकी सफलता दर लगभग 18 से 20 प्रतिशत रही थी। उन्होंने कहा, “यदि इस बार हमें 30 प्रतिशत सफलता भी मिल जाती है तो यह कार्यक्रम पूरी तरह सफल माना जाएगा।”
चेलुवरायस्वामी ने कहा कि बारिश की कमी के कारण आने वाले महीनों में जल संकट पैदा हो सकता है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार बारिश होने की संभावना है, लेकिन यह लगातार नहीं होगी।
उन्होंने कहा, “लोगों को उम्मीद है कि सरकार बारिश की कमी से राहत दिलाएगी। इन उम्मीदों को पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है। हम आने वाली गर्मियों से निपटने की भी तैयारी कर रहे हैं।”
क्लाउड सीडिंग का काम जल संसाधन विभाग द्वारा राज्य के चारों राजस्व मंडलों में किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि जिस क्षेत्र में क्लाउड सीडिंग की जाएगी, उसके लगभग 15 किलोमीटर के दायरे में वर्षा होने की संभावना रहती है। यह प्रक्रिया तभी संभव है जब उपयुक्त बादल उपलब्ध हों, इसलिए अभियान बादलों की उपलब्धता के अनुसार चलाया जाएगा।
इस कार्यक्रम पर लगभग 27 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। यह अभियान 60 दिनों तक चलेगा और इसके दौरान करीब 200 उड़ान घंटे का उपयोग किया जाएगा। क्लाउड सीडिंग का काम रोजाना सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि सितंबर महीने में घने बादलों की उपस्थिति अधिक रहने की संभावना है, जबकि अक्टूबर में बादलों की संख्या कम हो सकती है, इसलिए वर्तमान समय इस अभियान के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
चेलुवरायस्वामी ने कहा कि लोगों और पशुओं के लिए पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए सरकार इस परियोजना का पूरा वित्तीय भार उठाने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, “गर्मियों में संभावित समस्याओं से बचने के लिए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। झीलों और तालाबों को भरने तथा वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों को सहायता देने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।”



