तिरुवनंतपुरम, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल के लिए इसे एक ऐतिहासिक पल बताते हुए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने सोमवार को कहा कि राज्य विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने, वोटर लिस्ट से बाहर किए गए योग्य नागरिकों को वोट देने का अधिकार वापस दिलाने और चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया में बदलाव करने का प्रस्ताव पास किया है।
सीएम सतीशन ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि केरल ने इतिहास रचा है। पहली बार, केरल विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पास किया है।
विधानसभा में मुख्यमंत्री सतीशन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के विधायकों का समर्थन मिला जबकि भाजपा के तीन विधायकों ने इसका विरोध किया।
140 सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के 102 सदस्य, सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ के 35 सदस्य और भाजपा के तीन सदस्य हैं।
इस प्रस्ताव में मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटाने और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर चिंता जताई गई है।
इसमें सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की गई है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी योग्य नागरिक को वोट देने के अधिकार से वंचित न किया जाए।
मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि प्रस्ताव में अधिकारियों के सामने तीन मांगें रखी गई हैं। इनमें एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ियों को दूर करना, गलत तरीके से हटाए गए योग्य मतदाताओं के वोटिंग अधिकार बहाल करना, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया शुरू करना और चुनाव आयुक्तों को चुनने वाली समिति में सुधार करना शामिल है।
सतीशन ने कहा कि हमारी चुनावी प्रक्रिया की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। मतदाता सूची में बदलाव, योग्य मतदाताओं को वोटिंग अधिकार से वंचित करने और चुनाव आयोग की निष्पक्षता से जुड़ी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वोट देने का अधिकार हमारे लोकतंत्र की नींव है। किसी भी संस्था को हमारे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
केरल सरकार का रुख दोहराते हुए मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि वोट देने के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए और संविधान का सम्मान किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, प्रस्ताव पारित होने के तुरंत बाद विरोध कर रहे भाजपा समर्थकों ने विधानसभा परिसर के बाहर प्रस्ताव की एक प्रति जलाई।
