केरल हाई कोर्ट ने पूर्व विधायक एंटनी राजू की सजा पर रोक लगाने से किया इनकार, नहीं लड़ सकेंगे चुनाव

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कोच्चि, 17 मार्च (आईएएनएस)। विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व विधायक एंटनी राजू को बड़ा झटका लगा है। केरल हाई कोर्ट ने मंगलवार को उनकी सजा पर रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी। तिरुवनंतपुरम सेंट्रल से पूर्व विधायक एंटनी राजू ने अदालत से उस मामले में अपनी सजा पर रोक की मांग की थी, जिसमें उन पर कोर्ट के सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है। हाईकोर्ट के इस फैसले से चुनाव से पहले उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

इस फैसले से पूर्व मंत्री के चुनाव लड़ने पर प्रभावी रूप से रोक लग गई है, जिससे राज्य की राजधानी में राजनीतिक हलचल मच गई है।

4 जनवरी को नेदुमनगाड मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा इस मामले में उन्हें तीन साल की जेल की सज़ा सुनाए जाने के बाद से ही उनकी विधायकी खत्म हो गई थी, और मंगलवार को उन्हें एक और झटका लगा जब हाई कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

राजू ‘जनधिपत्य केरल कांग्रेस’ के एकमात्र विधायक हैं और दिसंबर 2024 तक राज्य के परिवहन मंत्री थे; इसके बाद सत्तारूढ़ ‘लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ़्रंट’ के बीच हुए समझौते के तहत उन्होंने एक अन्य सहयोगी दल के लिए यह पद छोड़ दिया था।

जस्टिस निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया, जिसका मतलब है कि ‘जनप्रतिनिधित्व अधिनियम’ के तहत उनकी अयोग्यता जारी रहेगी। सजा पर रोक लगे बिना एंटनी राजू अपना नामांकन दाखिल नहीं कर सकते, जिससे चुनाव में उनकी भागीदारी के लिए उपलब्ध अंतिम कानूनी रास्ता भी बंद हो गया है।

हालांकि, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च है, जिससे उन्हें कुछ और दिन मिल जाते हैं, क्योंकि अब वे स्थगन प्राप्त करने के लिए केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ या सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं।

इस मामले को अक्सर विवादास्पद “अंडरवियर केस” के रूप में जाना जाता है और यह मामला 1990 का है। उस समय कनिष्ठ वकील रहे एंटनी राजू पर नशीले पदार्थों के एक मामले में आरोपी की मदद करने के लिए भौतिक साक्ष्य, एक अंतर्वस्त्र के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया गया था। बाद में किए गए वैज्ञानिक जांचों से यह साबित हुआ कि अदालत से ले जाने के बाद साक्ष्यों में हेरफेर किया गया था।

कई स्तरों पर वर्षों तक चली कानूनी कार्यवाही के बाद, निचली अदालत द्वारा दिया गया दोषसिद्धि का फैसला अब एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ पर उनके लिए मुसीबत बन गया है।

गौरतलब है कि यह दूसरी बार है जब इस मामले ने उनकी चुनावी संभावनाओं को पटरी से उतार दिया है। कुछ साल पहले, उन्हें वामपंथी विचारधारा के दिग्गज नेता वी. एस. अच्युतानंदन की कड़ी आपत्तियों के बाद टिकट देने से इनकार कर दिया गया था, जिन्होंने नैतिक चिंताओं को उठाया था।

अदालत के फैसले से अब उन आपत्तियों को और बल मिला है। इस फैसले ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) को भी मुश्किल स्थिति में डाल दिया है। तिरुवनंतपुरम सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र में गठबंधन के संभावित उम्मीदवार एंटनी राजू थे।