तिरुवनंतपुरम, 11 जुलाई (आईएएनएस)। केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) द्वारा भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने अपना काम सावधानी और व्यवस्थित तरीके से शुरू कर दिया है। टीम आयोग के संवैधानिक दर्जे और उसे प्राप्त कानूनी सुरक्षा उपायों का भी ध्यान रख रही है।
एसआईटी बनाने का फैसला बुधवार को मुख्यमंत्री वीडी. सतीशन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।
इसके बनने के तुरंत बाद, पहले ही दिन टीम को 10 से अधिक शिकायतें मिली। इनमें कई हाई-प्रोफाइल भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ी के आरोप थे। इनमें केरल एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (केएएस), प्लानिंग बोर्ड चीफ की नियुक्ति, पुलिस उपाधीक्षक स्पेशल रिक्रूटमेंट परीक्षा, इकोनॉमिक्स एंड स्टैटिस्टिक्स रिसर्च ऑफिसर परीक्षा और होटल मैनेजमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद की भर्तियां शामिल थी।
टीम को जांच एजेंसी की कानूनी शक्तियों और पीएससी के संवैधानिक दर्जे के बीच संतुलन बनाने के लिए एक सावधानीपूर्वक तैयार किए गए क्रम का पालन करना होगा।
तुरंत आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के बजाय, एसआईटी पहले शिकायतों की पुष्टि करेगी, शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज करेगी, भर्ती रिकॉर्ड की जांच करेगी और आगे की कानूनी कार्रवाई का फैसला करने से पहले चयन प्रक्रियाओं से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ करेगी।
जांच का दायरा बढ़ने के कारण, राज्य सरकार ने एसआईटी में सदस्यों की संख्या बढ़ाकर आठ कर दी है। टीम की अगुवाई आईजी अजिता बेगम कर रही हैं, जो एडीजीपी एच. वेंकटेश की देखरेख में काम करेंगी। टीम में एक एसपी, एक डिप्टी एसपी, एक इंस्पेक्टर और अन्य अधिकारी शामिल हैं।
जांचकर्ता उन शिकायतों की भी जांच करेंगे, जिनमें आरोप लगाया गया है कि पिछले वर्षों में इसी तरह के पदों के लिए आयोजित इंटरव्यू और भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ी हुई हो सकती है।
25 जुलाई तक डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को एक शुरुआती रिपोर्ट सौंपे जाने की उम्मीद है। इसके बाद यह फैसला लिया जाएगा कि क्या औपचारिक रूप से आपराधिक मामले दर्ज करने और व्यापक जांच शुरू करने की जरूरत है।
इस जांच ने पीएससी की अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर भी नया ध्यान खींचा है। आयोग के पास एक पूरी तरह से काम करने वाली आंतरिक जांच विंग है, जिसके प्रमुख सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस होते हैं। उन्हें पुलिसकर्मियों की एक टीम का सहयोग मिलता है, जिनका काम परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्षता बनाए रखना है।
इस संस्थागत व्यवस्था के बावजूद आरोपों के सामने आने से सरकारी हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या मौजूदा आंतरिक जांच-पड़ताल काफी थी और क्या कोई चेतावनी संकेत मिले थे, और अगर मिले थे, तो क्या उन पर समय रहते कार्रवाई की गई थी।
बता दें कि केरल पीएससी में चेयरमैन समेत 16 सदस्य हैं, जिनकी नियुक्ति पिछली सरकार के दौरान हुई थी। अभी पांच पद खाली पड़े हैं और वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार ने अभी तक नई नियुक्तियां नहीं की हैं।

