तिरुवनंतपुरम, 6 जुलाई (आईएएनएस)। केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद और गहराने वाला है। भाजपा की युवा इकाई युवा मोर्चा ने मंगलवार से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। इससे पहले कांग्रेस के युवा संगठनों ने भी इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, जिससे भर्ती विवाद अब एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप लेता जा रहा है।
युवा कांग्रेस पीएससी भर्ती में कथित हेरफेर की न्यायिक जांच की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रही है।
आंदोलन की घोषणा करते हुए युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वी. मनु प्रसाद ने आरोप लगाया कि पिछली वामपंथी सरकार के दौरान पीएससी की कार्यप्रणाली को सुनियोजित तरीके से प्रभावित किया गया, ताकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं और उनके करीबी लोगों को फायदा पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे लाखों युवाओं के साथ अन्याय हुआ, जो वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
भाजपा युवा नेता ने आरोप लगाया कि भर्ती परीक्षाओं में कुछ चुनिंदा उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए 50 से अधिक प्रश्नों में विकल्प ‘बी’ को सही उत्तर रखा गया।
उन्होंने मत्स्य विभाग की भर्ती परीक्षा का भी जिक्र किया। उनका दावा है कि चयनित 42 उम्मीदवारों में से 30 से अधिक एक ही कॉलेज के स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकर्ता थे। उनके अनुसार, यह भर्ती प्रक्रिया में संगठित हेरफेर का संकेत है।
मनु प्रसाद ने यूनिवर्सिटी कॉलेज हत्या के प्रयास मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस मामले के आरोपी पुलिस भर्ती की मेरिट सूची में शीर्ष स्थानों पर पाए गए थे। उनके मुताबिक, ऐसे लगातार सामने आ रहे विवाद यह दिखाते हैं कि पीएससी प्रणाली को पारदर्शी बनाने में विफलता रही है।
उन्होंने मामले की पूरी तरह स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि आयोग द्वारा कराई जा रही आंतरिक जांच की विश्वसनीयता नहीं है और इसका उद्देश्य केवल जिम्मेदार लोगों को बचाना है।
उन्होंने कहा कि जिन पीएससी अध्यक्ष और सदस्यों पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, उन्हें नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो सरकार को उन्हें पद से हटाने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
युवा मोर्चा नेता ने इस मुद्दे पर विधानसभा में भाजपा विधायक द्वारा लाए गए प्रस्ताव का वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) दोनों द्वारा विरोध किए जाने की भी आलोचना की।
हालांकि भाजपा का कहना है कि केरल की प्रमुख भर्ती एजेंसी पीएससी की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए अब लगातार जनदबाव बनाना जरूरी है।

