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कोटिया विवाद: धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के हितों के लिए राजनीतिक दलों से एकजुट होने का आह्वान किया

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भुवनेश्वर, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। पूर्व केंद्रीय मंत्री और संबलपुर सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को कोटिया विवाद में ओडिशा के अधिकारों की रक्षा के लिए राजनीतिक संबद्धताओं और विचारों की परवाह किए बिना सभी को एकजुट होने की आवश्यकता पर बल दिया।

उनका यह बयान पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा विवादित क्षेत्र में स्थानीय निकाय चुनाव कराने के हालिया प्रयासों के बाद कोटिया क्षेत्र को लेकर नए सिरे से तनाव बढ़ने के बीच आया है।

गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश द्वारा कोटिया क्षेत्र में हालिया अतिक्रमण के बाद विपक्षी कांग्रेस, बीजू जनता दल (बीजद) और भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के बीच तीखी बयानबाजी चल रही है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विवाद को लेकर अपने विचार साझा करते हुए संबलपुर सांसद ने लिखा कि हम सभी जानते हैं कि कोटिया ओडिशा और ओडिया लोगों के लिए कितना महत्वपूर्ण है। कोटिया ओडिशा की संप्रभुता और अखंडता की पहचान है। एक ओडिया होने के नाते, कोटिया को लेकर चल रहा दीर्घकालिक सीमा विवाद निश्चित रूप से चिंता का विषय है। पार्टी संबद्धता से परे, ओडिशा के हितों के लिए एकजुट होना और सामूहिक समाधान खोजना आवश्यक है।

इस विवाद को सुलझाने के अपने प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए प्रधान ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अप्रैल 2018, फरवरी 2019 और अप्रैल 2023 में कोटिया गांव का दौरा किया था।

प्रधान ने कहा कि आंध्र प्रदेश के हस्तक्षेप और क्षेत्र में सीमा विवाद से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए, उन्होंने पहले ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान विपक्ष के नेता नवीन पटनायक को 18 नवंबर, 2020 और 31 अक्टूबर, 2022 को तथा आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी को 22 सितंबर, 2021 को पत्र लिखकर कार्रवाई का अनुरोध किया था।

प्रधान ने आगे कहा कि इस क्षेत्र के मुद्दों को सुलझाने में राजनीतिक हस्तियों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। संवाद के माध्यम से हमें सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाना होगा और समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ओडिशा की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा के लिए उत्कल गौरव मधुसूदन दास, उत्कलमणि गोपबंधु दास और व्यास कवि फकीर मोहन सेनापति सहित ओडिशा के महान सपूतों का बलिदान और समर्पण व्यर्थ नहीं जाएगा।

प्रधान ने कहा कि ओडिया गौरव के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। ओडिशा की एकता और अखंडता की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।