बेंगलुरु, 11 मई (आईएएनएस)। कर्नाटक में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने राज्य की कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिस संस्था का काम योग्य उम्मीदवारों को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी देना है, वही आज भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों के कारण युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
विजयेंद्र ने कहा कि राज्य सरकार ने हाल ही में 56,432 पदों पर भर्ती की घोषणा की थी, जो बेरोजगार युवाओं के बड़े आंदोलन के बाद लिया गया फैसला था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अभी तक इस भर्ती का कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुई है। इससे लाखों युवाओं में असमंजस और नाराजगी है।
उनका आरोप है कि केपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चयन प्रक्रिया चलानी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय इस पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार अदालतों ने भी आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और कुछ मामलों में दोषी अधिकारियों की पहचान भी हुई है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस सुधार नहीं किया गया है।
विजयेंद्र ने यह भी कहा कि अब आयोग नई तकनीक और सुधारों की बात कर रहा है, लेकिन युवाओं का भरोसा पहले ही टूट चुका है। उनके अनुसार, जब तक चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सख्त नियमों पर आधारित नहीं होगी, तब तक युवाओं का विश्वास वापस नहीं आ सकता।
उन्होंने सरकार से मांग की कि बिना देरी के 56,432 पदों की भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया जाए और प्रक्रिया को तेज और निष्पक्ष बनाया जाए। उनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो बेरोजगार युवाओं का गुस्सा बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने ग्रुप ए, बी और सी के कई पदों को भरने के लिए भर्ती को मंजूरी दी है। कैबिनेट द्वारा 2026 की शुरुआत में शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व विभागों में 400-पॉइंट रोस्टर प्रणाली और अनुसूचित जाति के लिए आंतरिक आरक्षण का उपयोग करके पदों को भरना है।
वहीं दूसरी तरफ, राज्य में विपक्ष और कुछ विधायकों ने भी केपीएससी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। हाल ही में विधानसभा में इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई थी, जिसमें सुधार की मांग की गई थी। विपक्ष का कहना है कि जब लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर हो, तो सरकार को जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए।

