बेंगलुरु, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने गुरुवार को कहा कि राज्य के अधिकांश जिलों में इस वर्ष सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। उन्होंने डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिया कि पेयजल की कमी से निपटने के लिए अभी से एहतियाती कदम उठाए जाएं।
विधान सौधा में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जिला प्रभारी मंत्री, डिप्टी कमिश्नर और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मौजूद थे। बैठक में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस साल मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान जताया है। हालांकि अगस्त में बारिश सामान्य रहने की संभावना है, लेकिन सितंबर में यह सामान्य से कम रह सकती है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि अगर कहीं पेयजल की कमी होती है तो संबंधित डिप्टी कमिश्नर जिम्मेदार होंगे। उन्होंने राजस्व, पंचायती राज और शहरी विकास विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अप्रैल से जून के बीच उत्तर आंतरिक कर्नाटक के अधिकांश जिलों में सामान्य से अधिक हीटवेव के दिन देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में अधिकारियों को जरूरी सावधानियां बरतने और मौसम पूर्वानुमानों को गंभीरता से लेने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने आम लोगों के लिए छाया और पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि पेयजल आपूर्ति के लिए धन की कोई कमी नहीं है और वित्त विभाग को जरूरत के अनुसार राशि जारी करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं।
राज्य में कुल 213 तालुक और 2,410 ग्राम पंचायतों को संभावित जल संकट वाले क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया है। वर्तमान में 114 तालुक की 598 ग्राम पंचायतों में पेयजल की समस्या बनी हुई है। 137 गांवों में 129 टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है, जबकि 515 गांवों में पानी की आपूर्ति के लिए 585 निजी बोरवेल किराए पर लिए गए हैं।
बैठक में बताया गया कि कलबुर्गी जिले की 147, बागलकोट की 114, बेलगावी की 127, चिक्कमगलुरु की 115, हावेरी की 138, मांड्या की 130, तुमकुरु की 141 और कारवार की 125 ग्राम पंचायतों में पानी की कमी हो सकती है।
वर्तमान में 27 शहरी निकायों में पानी की कमी है, जबकि 95 अन्य को संवेदनशील माना गया है। 145 वार्डों में 57 टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है और 22 बोरवेल किराए पर लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति केवल अत्यावश्यक स्थिति में ही की जाए और प्राथमिकता निजी बोरवेल किराए पर लेने को दी जाए। जरूरत पड़ने पर नए बोरवेल भी खोदे जा सकते हैं।
राज्य के 14 प्रमुख जलाशयों की कुल क्षमता के मुकाबले फिलहाल 321.93 टीएमसी पानी उपलब्ध है, जो कुल क्षमता का 36 प्रतिशत है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 330.35 टीएमसी था। फिलहाल पेयजल के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है।
हालांकि, मानसून में देरी की संभावना को देखते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मध्य जुलाई तक पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए जलाशयों में पर्याप्त पानी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सिंचाई के मुकाबले पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाए और जलाशयों में लीकेज की पहचान कर उन्हें तुरंत ठीक किया जाए।

