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असम: सीएम सरमा ने आईआईटी गुवाहाटी के छात्रों से कहा- जिंदगी कोई रेस नहीं, सफल होने के लिए अपना समय लें

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गुवाहाटी, 1 सितंबर (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को छात्रों और युवा प्रोफेशनल्स से सफलता पाने की कोशिश में धैर्य रखने को कहा।

उन्होंने कहा कि जिंदगी को ऐसी रेस नहीं समझना चाहिए जिसमें हर किसी से एक ही रफ्तार से आगे बढ़ने की उम्मीद की जाती है।

सरमा गुवाहाटी के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान (आईआईटी) 33वें स्थापना दिवस समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने इनोवेशन, लर्निंग और एकेडमिक एक्सीलेंस के सफर के लिए संस्थान को बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने छात्रों और फैकल्टी को संबोधित करते हुए कहा कि युवाओं को निराश नहीं होना चाहिए अगर वे अपने आसपास के लोगों की तरह तेजी से आगे नहीं बढ़ पाते हैं। सरमा ने छात्रों को हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “जिंदगी कोई रेस नहीं है। अगर आप तेज नहीं दौड़ते हैं, तो भी कोई बात नहीं। आप ‘टूटे हुए अंडे’नहीं कहलाएंगे।”

सरमा ने महत्वाकांक्षा और लगन के बारे में एक बड़ी बात समझाने के लिए मजाक का सहारा लेते हुए कहा कि सफलता को सिर्फ इस बात से नहीं मापा जाना चाहिए कि कोई कितनी जल्दी किसी खास मंजिल तक पहुंचता है। उन्होंने छात्रों को अपनी व्यक्तिगत यात्रा पर ध्यान देने, अपनी क्षमताओं को विकसित करने और दूसरों से तुलना के बोझ तले दबे बिना अपने लक्ष्यों की दिशा में काम करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

मुख्यमंत्री ने राज्य के शिक्षा और इनोवेशन इकोसिस्टम में आईआईटी गुवाहाटी के योगदान पर भी प्रकाश डाला और संस्थान को लर्निंग, रिसर्च और तकनीकी प्रगति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बताया।

उन्होंने कहा कि संस्थान की 33 साल की यात्रा ऐसे माहौल को बनाने के महत्व को दर्शाती है जहां युवा दिमाग प्रयोग कर सकें, इनोवेशन कर सकें और नए विचारों पर काम कर सकें।

सरमा की छात्रों के साथ यह बातचीत आईआईटी गुवाहाटी के 33वें स्थापना दिवस के मौके पर हुई, जिसमें संस्थान ने एकेडमिक और तकनीकी योगदान के तीन दशकों से ज्‍यादा का जश्न मनाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आईआईटी गुवाहाटी जैसे संस्थानों की तेजी से बदलती दुनिया के लिए युवा भारतीयों को तैयार करने में अहम भूमिका है, जहां ज्ञान, इनोवेशन और अनुकूलन क्षमता तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने छात्रों से संस्थान में अपने समय का पूरा फायदा उठाने और अपनी आकांक्षाओं को पूरा करते हुए अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखने का आग्रह किया।

सरमा की अनौपचारिक और मजेदार टिप्पणियों ने इस संदेश के लिए ध्यान आकर्षित किया कि सफलता के लिए कोई तय समय-सीमा नहीं होती है और लोगों को खुद को इसलिए असफल नहीं मानना ​​चाहिए क्योंकि उनकी यात्रा दूसरों की तुलना में धीमी है। उन्होंने कहा कि समाज में सार्थक योगदान देने के इच्छुक युवाओं के लिए धैर्य, लगन और लगातार सीखते रहना जरूरी गुण बने हुए हैं।