Monday, August 10, 2026
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गुजरात में शेरों के संरक्षण का मकसद समूचे इकोसिस्टम की सुरक्षा करना है : सीएम पटेल

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पोरबंदर/गांधीनगर, 10 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात में एशियाई शेरों की आबादी बढ़ाने के प्रयासों को सिर्फ एक मुहिम के तौर पर नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम को बचाने की एक व्यापक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। यह बात मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोमवार को पोरबंदर में ‘विश्व शेर दिवस’ के मौके पर कही।

पटेल ने गांधीनगर से पोरबंदर के ताजावाला हॉल में आयोजित कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल होते हुए कहा, “शेरों के संरक्षण का मतलब सिर्फ उनकी संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि पूरे इकोसिस्टम की रक्षा करने का संकल्प है। जंगलों, जल स्रोतों, खेती और इंसानी जिंदगी की सुरक्षा आपस में गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण की कोशिशों में लोगों की ज्यादा भागीदारी की अपील की।”

एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाने को लेकर मनाए जाने वाले सालाना ‘विश्व शेर दिवस’ कार्यक्रम में पोरबंदर में वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोधवाडिया शामिल हुए।

सीएम ने कहा, “गुजरात का आजाद घूमने वाले एशियाई शेरों का एकमात्र घर होना गर्व और जिम्मेदारी, दोनों की बात है। राज्य सरकार के अनुसार, शेरों की आबादी बढ़कर 891 हो गई है।”

मुख्यमंत्री पटेल ने इस बढ़ोतरी का श्रेय वन्यजीव संरक्षण के प्रति राज्य के लगातार प्रयासों को दिया और कहा कि गुजरात ने चार स्तंभों पर आधारित खास संरक्षण मॉडल विकसित किया है, आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक शोध, लोगों की भागीदारी और असरदार प्रशासन।

उन्होंने कहा कि यह मॉडल प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता संरक्षण, जल स्रोतों और वन्यजीवों की सुरक्षा और स्थानीय समुदायों को शामिल करने पर भी केंद्रित है।

पटेल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वन्यजीव और प्रकृति संरक्षण की सोच और वन विभाग की सक्रिय कार्यप्रणाली की वजह से गिर के शेरों के संरक्षण की सफल कहानी दुनिया भर में मशहूर हो गई है। स्थानीय समुदायों और शेरों के बीच का रिश्ता अब साथ-साथ रहने पर आधारित हो गया है।”

उन्होंने कहा कि पिछले ढाई दशकों में शेरों का दायरा तीन से बढ़कर 11 जिलों में फैल गया है। उन्होंने 143 साल बाद बारडा हिल्स में शेरों की वापसी का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि शेरों ने बारडा वन्यजीव अभयारण्य को प्राकृतिक रूप से अपने नए घर के तौर पर अपना लिया है। पोरबंदर समेत बारडा इलाके में कई प्राकृतिक आकर्षण हैं और यह एक पर्यटन स्थल के तौर पर उभर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने शेरों के आवासों के संरक्षण और बहाली, स्थानीय समुदायों को शामिल करने और पर्यावरण व विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए ‘प्रोजेक्ट लायन’ शुरू किया था।

पटेल ने गिर में हुई नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की बैठक का भी जिक्र किया और कहा कि इसने वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा दी है। उन्होंने बताया कि गिर के बाद बारडा इलाका शेरों के दूसरे घर के तौर पर उभर रहा है। 143 साल बाद शेर वाइल्डलाइफ सेंचुरी में वापस आए हैं। 2023 में पहले शेर के आने के बाद, अब इस इलाके में 26 शेर रह रहे हैं।

मोधवाडिया ने बताया कि जंगल सफारी पहल के तहत बरडा में लगभग 270 हेक्टेयर जमीन पर एक सफारी पार्क बनाने की योजना बनाई जा रही है। अगर वन्यजीव बचेंगे, तभी इंसानियत बच पाएगी।

उन्होंने नागरिकों और पर्यटकों से अपील की कि वे शेरों को परेशान न करें और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल के प्रमुख डॉ. जयपाल सिंह ने शेरों के संरक्षण के लिए राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी।