Friday, July 24, 2026
SGSU Advertisement

    कम लागत वाले सड़क सुरक्षा उपाय हादसों की संख्या में ला सकते हैं बड़ी कमी : एक्सपर्ट्स

    0
    4

    नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। कम लागत वाले उपाय जैसे आवासीय और स्कूल क्षेत्रों में 30 किलोमीटर प्रति घंटे का लो-स्पीड जोन बनाने से सड़क सुरक्षा में काफी सुधार हो सकता है। यह जानकारी शुक्रवार को एक्सपर्ट्स ने दी।

    इंटरनेशनल रोड फेडरेशन (आईआरएफ) की ओर से जारी बयान के अनुसार, यहां आयोजित एक कार्यक्रम में एक्सपर्ट्स ने उच्च दृश्यता वाले जेब्रा क्रॉसिंग और ऊंचे पैदल पार मार्ग जैसे व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले उपायों पर प्रकाश डाला, जो सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी कमी ला सकते हैं।

    परिवहन अनुसंधान एवं चोट निवारण कार्यक्रम की पूर्व चेयर प्रोफेसर और एमेरिटस प्रोफेसर प्रो. गीतम तिवारी ने कहा कि भारत शहरों में किफायती और साक्ष्य-आधारित उपायों के जरिए सड़क हादसों में होने वाली मौतों को काफी हद तक कम कर सकता है। उन्होंने पैदल यात्रियों के सड़क पार करने की दूरी कम करने के लिए कर्ब एक्सटेंशन (बल्ब-आउट) और चौड़ी सड़कों पर सुरक्षित आवाजाही के लिए मीडियन रिफ्यूज आइलैंड बनाने जैसे उपाय दिए।

    प्रो. तिवारी ने यातायात की गति को स्वाभाविक रूप से नियंत्रित करने के लिए लेन संकरी करने, चिकेन (सड़क की हल्की घुमावदार डिजाइन) लागू करने और रात के समय दृश्यता बढ़ाने के लिए रिफ्लेक्टिव संकेतकों और सड़क चिह्नों में सुधार करने की भी सिफारिश की।

    उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रथाओं को लागू करने की अपील करते हुए कहा कि ऐसे व्यावहारिक हस्तक्षेप दुर्घटनाओं को कम करने के साथ-साथ सभी सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए आवागमन को भी बेहतर बनाते हैं।

    आईआरएफ के प्रेसिडेंट एमेरिटस के.के. कपिला ने कहा, “भारत के तेजी से बढ़ते शहरों में शहरीकरण की रफ्तार के मुकाबले बुनियादी ढांचे का विकास पीछे रह जाने से सड़क सुरक्षा की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।”

    उन्होंने कहा कि आम धारणा के विपरीत, सड़क सुरक्षा केवल फ्लाईओवर और एक्सप्रेसवे जैसी महंगी परियोजनाओं पर निर्भर नहीं करती। अधिकांश शहरी सड़क दुर्घटनाएं सामान्य सड़कों पर मौजूद रोजमर्रा की डिजाइन संबंधी कमियों के कारण होती हैं।

    कपिला ने कहा, “राउंडअबाउट, ऊंचे पैदल पार मार्ग, ट्रैफिक शांत करने वाले उपाय, बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग और सुरक्षित चौराहा डिजाइन जैसे कम लागत वाले इंजीनियरिंग उपायों से सड़क दुर्घटनाओं में 20 से 80 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। इनकी लागत बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की तुलना में काफी कम होती है। ऐसे उपाय तेजी से लागू किए जा सकते हैं और तुरंत सुरक्षा लाभ प्रदान करते हैं।”

    उन्होंने आगे कहा कि सड़क सुरक्षा में प्रगति के सामने कई चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। इनमें सड़क सुरक्षा के लिए कई एजेंसियों की जिम्मेदारी, यातायात नियमों का कमजोर पालन, मौजूदा शहरी सड़कों में सुधार की जटिलता, बिखरी हुई वित्तीय व्यवस्था, दुर्घटना संबंधी अपर्याप्त आंकड़े और दुर्घटना के बाद चिकित्सा व्यवस्था की कमी, तथा पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए सड़क स्थान आवंटित करने का विरोध शामिल हैं।

    आईटीएस इंडिया फोरम के अध्यक्ष अखिलेश श्रीवास्तव ने सिद्ध इंजीनियरिंग उपायों के साथ इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस) को एकीकृत करने के महत्व पर जोर दिया।

    —आईएएनएस

    एबीएस