SGSU Advertisement
Home मनोरंजन ‘लस्ट स्टोरीज 3’ रिव्यू: चार कहानियां, चार अंदाज और रिश्तों की उलझी...

‘लस्ट स्टोरीज 3’ रिव्यू: चार कहानियां, चार अंदाज और रिश्तों की उलझी दुनिया में ढेर सारे ट्विस्ट

0
1

रेटिंग: 4 स्टार

‘लस्ट स्टोरीज’ कभी भी रिश्तों को एकदम सीधी और आसान कहानी की तरह दिखाने के लिए नहीं जानी गई। यह सीरीज रिश्तों, ख्वाहिशों और उनके उलझे हुए पहलुओं को अलग-अलग नजरिए से सामने लाती है। ‘लस्ट स्टोरीज 3’ भी इसी अंदाज को आगे बढ़ाती है। पहले दो पार्ट की सफलता के बाद इस बार चार अलग-अलग फिल्ममेकर्स चार ऐसी कहानियां लेकर आए हैं, जिनमें रिश्तों के कई अनदेखे पहलू देखने को मिलते हैं।

फिल्म की शुरुआत विक्रमादित्य मोटवानी की कहानी से होती है, जो शुरुआत से ही आपका ध्यान खींच लेती है। इसमें राधिका आप्टे, कोंकणा सेन शर्मा, विजय वर्मा और अभिषेक शर्मा नजर आते हैं। कहानी पति-पत्नी के रिश्ते में ‘हसबैंड स्वैपिंग’ जैसे अजीब आइडिया के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी में कोरियन फिक्शन का असर भी देखने को मिलता है, जो इसे आम रिलेशनशिप ड्रामा से थोड़ा अलग बनाता है।

इसके बाद कहानी का मूड पूरी तरह बदल जाता है। किरण राव की कहानी में गुरफतेह पीरजादा और सना थंपी लीड रोल में हैं। यह कहानी ड्रग्स और पैसों के इर्द-गिर्द घूमती है और काफी मजेदार अंदाज में आगे बढ़ती है। इसमें ट्विस्ट भी हैं और एक हल्का-फुल्का अंदाज भी, जो इसे बाकी कहानियों से अलग बनाता है। कहानी अपने ट्विस्ट पर बहुत ज्यादा जोर नहीं देती और यही चीज इसे मनोरंजक बनाती है।

इसके बाद शकुन बत्रा की कहानी रिश्तों और शादी की उलझनों के बीच लेकर जाती है। अली फजल और राधिका मदान ऐसे किरदार निभा रहे हैं, जिनकी जिंदगी में लस्ट, थेरेपी, परिवार का दबाव, तलाक और मानसिक बोझ जैसी कई चीजें एक साथ चल रही हैं। कहानी में काफी कुछ देखने को मिलता है और कई बार चीजें उलझी हुई भी लगती हैं। जिस तरह रिश्ते खुद कई बार उलझ जाते हैं, उसी तरह कहानी भी उन भावनाओं को बिखरे हुए अंदाज में सामने रखती है।

फिल्म का चौथा सेगमेंट विशाल भारद्वाज लेकर आए हैं, जो कहानी को सीधे 1987 के दौर में ले जाता है। इसमें अदिति राव हैदरी, सिद्धार्थ और गजराज राव मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह कहानी उस दौर की पृष्ठभूमि में गंभीर विषय को छूती है। कहानी में नक्स वोमिका और बेलाडोना जैसी होम्योपैथिक दवाओं का जिक्र भी आता है, जो इसके अजीबोगरीब और दिलचस्प अंदाज को और बढ़ाता है।

‘लस्ट स्टोरीज 3’ की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें चारों कहानियां अपने-अपने तरीके से कुछ ऐसा छोड़ती हैं, जिसके बारे में आप फिल्म खत्म होने के बाद भी सोचते रहते हैं। हर सेगमेंट का टोन अलग है और यही चीज एंथोलॉजी को बोरिंग होने से बचाती है। फिल्म एक कहानी से दूसरी कहानी पर आराम से जाती है।

कुल मिलाकर, ‘लस्ट स्टोरीज 3’ बोल्ड, एंटरटेनिंग और नए एक्सपेरिमेंट करने को तैयार है। यह असहज विषयों, उलझी भावनाओं और अचानक आने वाले ट्विस्ट को खुलकर जगह देती है। चारों कहानियां अपनी अलग पहचान बनाए रखती हैं और यह साबित करती हैं कि सही कहानियों और अलग-अलग फिल्ममेकर्स के साथ एंथोलॉजी फॉर्मेट आज भी काफी असरदार हो सकता है।