मुंबई, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। मराठी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री और लावणी कलाकार मधु कांबिकर का सोमवार को 73 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दुख जताया और मराठी फिल्म, थिएटर और लोक कला के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया।
मधु कांबिकर ने चार दशक से अधिक लंबे करियर में अपनी एक्टिंग और डांस से महाराष्ट्र की पारंपरिक लोक कलाओं को पहचान दिलाई।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शोक संदेश जारी कर अभिनेत्री को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, ”मधु कांबिकर के निधन की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने फिल्मों, लोक नाटकों, प्रोफेशनल थिएटर और टीवी सीरियल्स में कई अहम किरदार निभाए। ‘हेच माझा माहेर’, ‘रघु मैना’, ‘एक होता विदूषक’, ‘झपाटलेला’, ‘देऊल’ और ‘येऊ का घरात’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों का प्यार मिला। उन्होंने अपने अभिनय और डांस के शानदार मेल से ग्रामीण जीवन से जुड़ी लोक कलाओं को लोकप्रिय बनाने के लिए लगातार काम किया।”
उन्होंने आगे कहा, ”मधु कांबिकर चार दशक से ज्यादा समय तक एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक्टिव रहीं और उन्होंने मराठी मनोरंजन जगत को समृद्ध किया। उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। मैं उन्हें दिल से श्रद्धांजलि देता हूं। उनके परिवार और चाहने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं।”
मधु कांबिकर मराठी सिनेमा, थिएटर और लोक कला की दुनिया में जाना-पहचाना नाम थीं। अपने लंबे करियर में उन्होंने महाराष्ट्र के ग्रामीण जीवन और वहां की संस्कृति को अपने किरदारों के जरिए पर्दे पर उतारा। उनकी एक्टिंग में स्थानीय बोली, रहन-सहन और लोक परंपराओं की झलक देखने को मिलती थी।
उनकी चर्चित मराठी फिल्मों में ‘शापित’, ‘हेच माझा माहेर’, ‘एक होता विदूषक’, ‘झपाटलेला’ और ‘रघु मैना’ शामिल हैं। उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी काम किया। वह ‘सूत्रधार’, ‘यशवंत’ और ‘हम दोनों’ जैसी फिल्मों का हिस्सा रहीं। उन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा के साथ-साथ थिएटर में भी अलग पहचान बनाई।
मधु कांबिकर का योगदान सिर्फ एक्टिंग तक सीमित नहीं था। वह महाराष्ट्र की पारंपरिक लोक कला लावणी को आगे बढ़ाने और उसे नई पहचान दिलाने से भी जुड़ी रहीं। अपने परफॉर्मेंस के जरिए उन्होंने लावणी को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। लावणी महाराष्ट्र की लोकप्रिय लोक कला है, जिसमें संगीत, डांस और अभिनय का खास मेल देखने को मिलता है।
मधु कांबिकर लंबे समय से बीमार थीं और पुणे में 12 अक्टूबर को उन्होंने अंतिम सांस ली।
