SGSU Advertisement
Home राजनीति भाजपा विधायक रॉबिंद्रो सिंह ने कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम से कहा, अदालत...

भाजपा विधायक रॉबिंद्रो सिंह ने कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम से कहा, अदालत में साबित करें बेगुनाही

0
5

इंफाल, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। मणिपुर के भाजपा विधायक टोंगब्रम रॉबिंद्रो सिंह ने गुरुवार को कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम से आग्रह किया कि अगर वे खुद को निर्दोष मानते हैं, तो जल्द से जल्द कानूनी रास्ता अपनाएं और अपने खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को झूठा साबित करें।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर अकोइजम को उनके खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

इंफाल पश्चिम जिले में ‘सेवा संकल्प अभियान’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा विधायक रॉबिंद्रो सिंह ने कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए अदालत ही सही जगह है। उन्होंने सांसद से कानूनी तरीके से इन आरोपों को चुनौती देने को कहा।

उन्होंने कहा कि मणिपुर के बाहर के लोगों द्वारा सांसद पर महिलाओं और लड़कियों से जुड़े जो आरोप लगाए गए हैं, उन्होंने राज्य के लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है।

भाजपा नेता ने कहा कि मणिपुर को जो शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है, उसे दूर करने के लिए अदालत में अकोइजम की बेगुनाही साबित करना जरूरी है।

इससे पहले, मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इन आरोपों के मद्देनजर अकोइजम से लोकसभा से इस्तीफा देने की मांग की थी।

मुख्यमंत्री ने फेसबुक और एक्स पर की गई पोस्ट में कांग्रेस सांसद को जेएनयू से बर्खास्त करने के फैसले को “बेहद परेशान करने वाला और शर्मनाक” बताया।

खेमचंद सिंह ने कहा था, “एक उच्च विधायी पद पर बैठे व्यक्ति और एक प्रोफेसर द्वारा इस तरह का गंभीर कदाचार अस्वीकार्य है और इससे मणिपुर की छवि खराब होती है। चूंकि एक सांसद लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए संसद की गरिमा बनी रहनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि नैतिक आधार पर अकोइजम के पास जन प्रतिनिधि के रूप में बने रहने का अधिकार नहीं रह गया है। उन्हें लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए तुरंत लोकसभा से इस्तीफा दे देना चाहिए।

जेएनयू की कुलपति शांतिश्री डी. पंडित ने 9 अक्टूबर के एक आदेश में बताया कि विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने अकोइजम के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच की थी। आदेश के अनुसार, समिति के निष्कर्षों के आधार पर और उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए विश्वविद्यालय ने लागू सेवा नियमों के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की सजा सुनाई है।