चेन्नई, 27 सितंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मेट्टूर बांध के जलस्तर में आई गिरावट के बाद रविवार को 80.52 फीट पर रह गया। सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने की मात्रा बांध में आने वाले पानी से कहीं ज्यादा है, जिससे कावेरी डेल्टा के किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसान अभी भी अपने खेतों में पर्याप्त पानी पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे सांबा धान की बुवाई कर सकें।
रविवार सुबह 8 बजे बांध में पानी की आवक घटकर 1,488 क्यूसेक रह गई, जो पहले 1,636 क्यूसेक थी। वहीं डेल्टा में सिंचाई के लिए 12,400 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जो बांध में आ रहे पानी से आठ गुना से भी ज्यादा है।
पानी की आवक कम और निकासी ज्यादा होने से बांध का जलस्तर 81.16 फीट से गिरकर 80.52 फीट पर आ गया है। बांध में कुल भंडारण 42.47 टीएमसी (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) बचा है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि मेट्टूर बांध पर कितना दबाव है, जो डेल्टा के बड़े हिस्से के लिए सिंचाई का मुख्य स्रोत है।
भले ही बांध से पानी छोड़ा जा रहा है, लेकिन किसानों का कहना है कि कई नहरों और आखिरी छोर के इलाकों तक अभी भी पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा है। इस देरी की वजह से वे सांबा की खेती शुरू करने से हिचक रहे हैं, क्योंकि नई लगाई गई धान की फसल के लिए पानी की लगातार सप्लाई जरूरी होती है।
इस साल मेट्टूर बांध को डेल्टा में सिंचाई के लिए 1 सितंबर को खोला गया था, जबकि आमतौर पर इसे 12 जून को खोला जाता है। इस बार जलस्तर कम होने की वजह से इसे देरी से खोला गया।
ग्रैंड एनीकट से कावेरी, वेन्नार, ग्रैंड एनीकट नहर और कोल्लिडम सिस्टम में 6 सितंबर से पानी छोड़ा जाना शुरू हुआ था। इसके बावजूद डेल्टा के कई हिस्सों में किसानों का कहना है कि मेट्टूर बांध खुलने के लगभग चार हफ्ते बाद भी उनके खेतों तक पानी नहीं पहुंचा है।
देरी से खुलने के कारण जमीन तैयार करने, नर्सरी लगाने और धान की रोपाई के लिए मिलने वाला समय पहले ही कम हो गया है। जो किसान बिना पक्के पानी के खेती शुरू करते हैं, उन्हें डर है कि शुरुआती दिनों में नहरें सूख गईं तो उनकी फसल खराब हो जाएगी। वहीं जो इंतजार कर रहे हैं, उनके पास सांबा सीजन पूरा करने के लिए बहुत कम समय बचा है। आवक और निकासी के बीच का यह अंतर बताता है कि मौजूदा सिंचाई को बनाए रखने के लिए बांध का पानी तेजी से खाली हो रहा है।
रविवार को आवक और कम होने के बाद अब किसान बांध के जलस्तर और नहरों के जरिए पानी पहुंचने की प्रगति पर नजर रखे हुए हैं। डेल्टा के आखिरी छोर पर बैठे किसानों के मन में अभी एक ही सवाल है कि क्या अभी छोड़ा जा रहा पानी सांबा फसल के लिए समय पर पहुंच पाएगा।
