तिरुची, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। दूध खरीद भुगतान में कटौती को लेकर तिरुची के दुग्ध उत्पादक किसानों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं। उनका कहना है कि उन्हें तमिलनाडु सरकार द्वारा घोषित संशोधित दर से कम राशि मिल रही है।
राज्य सरकार ने हाल ही में गाय के दूध की खरीद दर में 6 रुपये की वृद्धि की है, जिससे यह 38 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 44 रुपये प्रति लीटर हो गई है। भैंस के दूध की खरीद दर 53 रुपये प्रति लीटर तय की गई है। यह विवाद 3 अक्टूबर को किसानों के बैंक खातों में भुगतान पहुंचने के बाद सामने आया।
दूध उत्पादकों का आरोप है कि सहकारी दुग्ध समितियों ने उनके भुगतान में से प्रति लीटर 4 रुपये काट लिए हैं, जिससे उन्हें मिलने वाली राशि घटकर 40 रुपये रह गई है। जब किसानों ने इस कटौती का कारण पूछा, तो समिति के अधिकारियों ने कथित तौर पर बताया कि यह राशि कर्मचारियों के वेतन, प्रशासनिक खर्च, त्योहार बोनस और महीने के अंत में मिलने वाले इंसेंटिव (प्रोत्साहन राशि) के लिए रोकी गई है।
उन्होंने बताया कि उन्हें जो विवरण दिया गया था, उसमें वेतन और प्रशासन के लिए 1.85 रुपये प्रति लीटर, पोंगल बोनस के लिए 1.15 रुपये और महीने के अंत में प्रोत्साहन राशि के रूप में भुगतान के लिए 1 रुपये शामिल थे।
किसानों का तर्क था कि इन कटौतियों से मूल्य संशोधन से मिलने वाली राहत कमजोर हो गई है, खासकर तब जब चारे, पशु आहार और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर खर्च बढ़ गया है। उनका कहना था कि सरकार को प्रशासनिक और संबंधित लागतें वहन करनी चाहिए, न कि उत्पादकों पर डालनी चाहिए।
हालांकि, आविन के तिरुची प्रबंधन ने कटौती को लेकर अलग ब्यौरा दिया है। उन्होंने बताया कि सहकारी दुग्ध समितियों के प्रशासनिक खर्चों के लिए 1.75 रुपये प्रति लीटर वसूले जा रहे हैं, जबकि 1 रुपया किसानों को भुगतान के लिए रखा जा रहा है। उत्पादकों को 2.75 रुपये की कटौती के बाद उनके बैंक खातों में 41.25 रुपये प्रति लीटर प्राप्त होंगे।
प्रबंधन ने कहा कि बोनस के लिए कोई अलग से कटौती नहीं की जाएगी। एकत्रित 1.75 रुपये में से आधा हिस्सा सोसायटी के खर्चों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि शेष राशि का उपयोग दूध उत्पादकों को बोनस वितरित करने के लिए किया जाएगा।
उत्पादक प्रतिनिधियों ने प्रति लीटर 1 रुपये की कटौती करने और बाद में प्रोत्साहन के रूप में उसे वापस करने की आवश्यकता पर सवाल उठाया।
उन्होंने दुग्ध संघ से तत्काल पूरी राशि जारी करने का आग्रह किया। किसानों ने कहा कि पहले कटौती मामूली थी, जबकि अब रोकी गई राशि से उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से समिति के खर्चों को वहन करने और यह सुनिश्चित करने की अपील की कि मूल्य वृद्धि पूरी तरह से उत्पादकों तक पहुंचे।
