भोपाल, 22 अप्रैल (आईएएनएस) मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद ने बुधवार को राज्य के चयनित मेडिकल कॉलेजों के परिसरों में मरीजों के परिजनों के लिए आवास सुविधाओं की स्थापना को मंजूरी दी। ये सुविधाएं परोपकारी संगठनों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।
ये संगठन अपने स्वयं के संसाधनों से ऐसे ‘रिलेटिव रेस्ट हाउस’ स्थापित करेंगे; राज्य सरकार इस उद्देश्य के लिए किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान नहीं करेगी।
इन सेवाओं के लिए संगठनों द्वारा ली जाने वाली फीस राज्य सरकार द्वारा गठित एक समिति द्वारा निर्धारित की जाएगी।
इस प्रस्तावित व्यवस्था से मरीजों के परिजनों को किफायती दरों पर बेहतर आवास सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होगा।
इसके फलस्वरूप, अस्पताल के समग्र प्रबंधन पर सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और संचालन सुचारू रूप से चलेगा।
दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीज अक्सर मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में इलाज कराते हैं।
वे हमेशा अपने परिजनों के साथ आते हैं।
इनमें से कई परिजनों के लिए अस्पताल परिसर के बाहर आवास की व्यवस्था का वित्तीय बोझ वहन करने में असमर्थ होने के कारण, अंततः अस्पताल परिसर के भीतर ही सोना पड़ता है।
इससे अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, साथ ही परिजनों को रहने के लिए आरामदायक जगह भी नहीं मिल पाती।
इस स्थिति का अस्पताल के प्रशासनिक प्रबंधन और मरीजों/रिश्तेदारों तथा अस्पताल के कर्मचारियों के बीच संबंधों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है, जिससे अस्पताल के समग्र कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
मंत्रिपरिषद ने राज्य भर में उन्नत चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने, मौजूदा मेडिकल कॉलेजों का उन्नयन करने और मंडला में एक नया सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत 5,479 करोड़ रुपए के आवंटन को मंजूरी दी है।
इस अनुमोदन के अनुसार, मुख्यमंत्री की व्यापक एवं उन्नत तृतीयक स्वास्थ्य सेवा संस्थान सुदृढ़ीकरण योजना (सीएम केयर 2025) के निरंतर संचालन के लिए पांच वर्षों की अवधि हेतु 3,628 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।

