पुणे, 9 सितंबर (आईएएनएस)। पुणे में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) परीक्षा की तैयारी कर रहे एक युवक ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि पेपर लीक की बार-बार हो रही घटनाओं और आर्थिक तंगी के कारण उसने यह कदम उठाया।
मृतक की पहचान प्रथमेश देशमुख के तौर पर हुई है। पुलिस को शक है कि गंभीर आर्थिक परेशानियों, जिसमें 2.5 लाख रुपए का बकाया कर्ज भी शामिल है, के कारण उसने यह कठोर कदम उठाया।
इस दुखद घटना ने राज्य में परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। पुणे जिसे महाराष्ट्र का एजुकेशन हब माना जाता है, हाल ही में बार-बार पेपर लीक होने के मामलों, जिनमें नीट, सीईटी और ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा का पेपर लीक शामिल है, के कारण कड़ी जांच के घेरे में आ गया है।
इस घटना के बाद महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और कॉकरोच जनता पार्टी (जीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। एमपीएससी के चेयरमैन और सेक्रेटरी के तुरंत इस्तीफे की मांग करते हुए सपकाल ने राज्य सरकार पर अपनी जिम्मेदारी से भागने का आरोप लगाया।
सपकाल ने कहा, “सरकार बहरी और अंधी बनी हुई है। धाराशिव के एक छात्र ने अपनी जान दे दी। यह सरकारी उदासीनता का शिकार है।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर चेयरमैन इस्तीफा नहीं देते हैं तो इसका मतलब है कि वह मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी हैं और उन्हें खास तौर पर पेपर लीक में मदद करने के लिए नियुक्त किया गया था।”
प्रथमेश की मौत पर दुख जताते हुए सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने राज्य भर के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों से अपील की कि वे कोई भी चरम कदम न उठाएं। परीक्षा की तैयारी के लिए पुणे आने वाले ग्रामीण छात्रों की मुश्किलों का जिक्र करते हुए दिपके ने कहा कि भले ही सरकार उनकी जान की परवाह न करे, लेकिन उनके परिवार उन पर निर्भर हैं।
देशमुख की आत्महत्या की घटना तब हुई, जब एमपीएससी के उम्मीदवारों ने पेपर लीक के मामले में एमपीएससी के चेयरमैन और संबंधित अधिकारियों के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को पुणे और मंगलवार को छत्रपति संभाजीनगर में विरोध प्रदर्शन किया था।
एमपीएससी एक्साइज (विभागीय) परीक्षा से जुड़े हालिया खुलासों का जिक्र करते हुए प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक गड़बड़ियों में सीधे तौर पर संस्था की मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने उन रिपोर्टों की ओर इशारा किया, जिनमें एक उच्च-स्तरीय संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी के परीक्षा के मार्किंग पैटर्न को लीक करने में शामिल होने की बात कही गई थी।
उन्होंने मांग की कि मौजूदा एमपीएससी चेयरमैन और सेक्रेटरी को तुरंत हटाया जाए और उनकी जगह बेदाग छवि वाले अधिकारियों को नियुक्त किया जाए। घोटाले के आरोपों और पैटर्न लीक में शामिल सभी अधिकारियों और बिचौलियों के खिलाफ व्यापक आपराधिक जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और एमपीएससी की परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पूरी तरह से संरचनात्मक सुधार और सफाई की जाए।
एनसीपी (एसपी) के एमएलए रोहित पवार, जो एमपीएससी उम्मीदवारों की मांगों का जोरदार समर्थन कर रहे हैं, ने कहा, “यह बहुत चौंकाने वाली बात है कि जहां छात्र कड़ी तैयारी के लिए दिन में 20 घंटे देते हैं, वहीं आयोग के अधिकारी कथित तौर पर परीक्षा का मटीरियल बेच रहे हैं। मेहनती उम्मीदवारों के साथ यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मार्च राजनीतिक नहीं है। यह हमारे युवाओं के भविष्य की लड़ाई है।”
विपक्षी पार्टियों द्वारा इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के आरोपों को खारिज करते हुए रोहित पवार ने जोर देकर कहा कि यह विरोध प्रदर्शन लोगों के असली गुस्से को दिखाता है।
उन्होंने पूछा, “क्या निष्पक्ष मौकों की मांग करने वाले छात्रों की मांगें राजनीतिक हैं? ये उम्मीदवार अपने अधिकारों की रक्षा के लिए खुद से इकट्ठा हुए हैं। भ्रष्टाचार के जरिए पद पाने के लिए 50 से 60 लाख रुपए देने वालों को न तो ये छात्र और न ही महाराष्ट्र राज्य स्वीकार करेगा।”
