बेंगलुरु, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक में पिछले लगभग 75 वर्षों के सबसे गंभीर सूखों में से एक के कारण राज्य की करीब 90 प्रतिशत फसलें प्रभावित हुई हैं। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र से सहायता का इंतजार किए बिना अपने संसाधनों से किसानों को राहत राशि की पहली किस्त के रूप में 2,500 रुपए देने का फैसला किया है। उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने बुधवार को यह जानकारी दी।
बल्लारी जिले के सूखाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने और हलाकुंडी गांव में तूर की फसल का निरीक्षण करने के बाद मीडिया से बातचीत में परमेश्वर ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता फसल नुकसान झेल रहे और कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे किसानों की मदद करना है।
उन्होंने बताया कि राज्य के लगभग 240 तालुकों में से 217 को पहले ही सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है, जबकि बाकी 23 तालुकों में स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 10 से 15 और तालुकों को भी सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सूची में शामिल किया जा सकता है।
परमेश्वर ने कहा, “कर्नाटक की करीब 90 प्रतिशत फसलें प्रभावित हुई हैं।” उन्होंने बताया कि समस्या केवल वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि सिंचित क्षेत्रों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में किसानों ने पहले तूर की बुवाई की थी, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण फसल खराब हो गई।
बाद में कुछ बारिश होने पर किसानों ने ज्वार जैसी वैकल्पिक फसलें बोईं, लेकिन वे भी सफल नहीं हो सकीं। इससे कई किसान बिना किसी उपज के रह गए हैं।
उन्होंने कहा कि बल्लारी, विजयनगर और आसपास के क्षेत्रों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। कर्नाटक का दौरा करने वाली केंद्रीय टीमों ने भी इन क्षेत्रों में सूखे की स्थिति का निरीक्षण किया है।
परमेश्वर ने कहा कि सूखे का असर पेयजल उपलब्धता पर भी पड़ा है और कई गांवों में पानी की कमी हो गई है। उन्होंने बताया कि सरकार ने पेयजल आपूर्ति सहित तत्काल राहत उपायों के लिए धन जारी कर दिया है और उपायुक्तों को उपलब्ध राशि का उपयोग कर लोगों की सहायता करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सहायता की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद केंद्र सरकार ने अभी तक कोई राशि जारी नहीं की है।
केंद्रीय सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की राहत दी जाती है, लेकिन कर्नाटक सरकार ने केंद्र की सहायता का इंतजार नहीं करने का फैसला किया है।
परमेश्वर ने कहा, “केंद्र की सहायता का इंतजार किए बिना राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से किसानों को राहत राशि की पहली किस्त के रूप में 2,500 रुपए देने का निर्णय लिया है।”
उन्होंने बताया कि इस संबंध में सरकारी आदेश जारी किया जा चुका है और उपायुक्तों को राशि तत्काल जारी करने के निर्देश दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में किसानों को अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाएगी।
परमेश्वर ने कहा, “हम केवल यह कहकर नहीं बैठ सकते कि केंद्र ने एक भी रुपए जारी नहीं किया।” उन्होंने कहा कि सरकार अपनी ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी और इस मुश्किल समय में किसानों को अकेला नहीं छोड़ेगी।
राज्य सरकार ने 177 तालुकों को शामिल करते हुए केंद्र को दो ज्ञापन सौंपे हैं, जिनमें फसल और सूखे से हुए कुल नुकसान का अनुमान करीब 46,000 करोड़ रुपये लगाया गया है।
एनडीआरएफ के दिशा-निर्देशों के तहत मिलने वाली सहायता के आधार पर राज्य ने केंद्र से लगभग 11,000 करोड़ से 11,500 करोड़ रुपये की मदद मांगी है।
केंद्रीय सरकार की तीन टीमें पहले ही कर्नाटक के सूखाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा ले चुकी हैं।
परमेश्वर ने कहा कि टीमों के लिए हर तालुका या गांव का दौरा करना जरूरी नहीं था और उन्होंने नमूना आधारित निरीक्षण किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पास उपग्रह आधारित फसल और सूखे से संबंधित आंकड़े भी उपलब्ध हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि 2023 के सूखे के दौरान कर्नाटक को लगभग 49,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था और राज्य ने केंद्र से करीब 18,000 करोड़ रुपए की सहायता मांगी थी।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में कोई सहायता नहीं मिलने पर राज्य सरकार अदालत गई थी, जिसके बाद न्यायालय के निर्देश पर लगभग 3,500 करोड़ रुपए जारी किए गए थे।
कृषि ऋणों के संबंध में परमेश्वर ने कहा कि बैंकों को वसूली स्थगित करने तथा सूखे की स्थिति को देखते हुए ऋण पुनर्गठन और पुनर्वित्त की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों को बैंकों द्वारा भेजे गए नोटिसों को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि निजी वित्तीय संस्थानों और राष्ट्रीयकृत बैंकों को भी ऋण वसूली टालने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि फिलहाल सरकार का ध्यान तत्काल वित्तीय सहायता और ऋण वसूली स्थगित करने पर है, जबकि कृषि ऋण माफी और ब्याज माफी जैसी मांगों पर आने वाले दिनों में विचार किया जाएगा।
परमेश्वर ने कहा, “इस समय किसान हमारी प्राथमिकता हैं।”
उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण और अन्य परियोजनाओं पर बाद में काम किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल किसानों की सुरक्षा और सहायता सबसे महत्वपूर्ण है।
