नई मुसीबत में फंसा पाक‍िस्‍तान, आईएमएफ की नई 11 शर्तों से बढ़ा दबाव

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नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और अब एक नई मुसीबत में फंस गया है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) ने उसके सात अरब डॉलर के चल रहे एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (ईएफएफ) प्रोग्राम में 11 नई शर्तें जोड़ दी हैं।

बिजनेस रिकॉर्डर की रिपोर्ट के मुताबिक, एक शर्त यह है कि सरकार स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स (एसईजेड) एक्‍ट और स्पेशल टेक्नोलॉजी जोन्स अथॉरिटी एक्ट में बदलाव करे। इसका मकसद मौजूदा टैक्स छूट जैसी सुविधाओं को धीरे-धीरे खत्म करना और मुनाफे के आधार पर मिलने वाली राहत की जगह लागत के आधार पर राहत देना है।

रिपोर्ट में एक और बात को लेकर चिंता जताई गई है कि सरकार कराची में 6000 एकड़ जमीन एसईजेड डेवलपर्स को बिना किसी शुल्क के लीज पर देने की योजना बना रही है।

हालांकि, अक्टूबर 2024 में आईएमएफ के दस्तावेजों में कहा गया था कि पाकिस्तान की टैक्स प्रणाली का इस्तेमाल कई खास सेक्टरों जैसे रियल एस्टेट, कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा को छूट देने के लिए किया गया है, जो पारदर्शी नहीं है। इसके अलावा स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) की संख्या भी काफी बढ़ गई है।

इसलिए शर्त रखी गई है कि मौजूदा एसईजेड को अगले दस साल में धीरे-धीरे खत्म किया जाएगा और नए एसईजेड नहीं बनाए जाएंगे। एक और नई शर्त यह है कि बिजनेस माहौल को बेहतर बनाने के लिए एक रेगुलेटरी रजिस्ट्री बनाई जाए।

रिपोर्ट के अनुसार, यह भी अक्टूबर 2024 की शर्तों में शामिल था कि सरकार केंद्र और राज्यों के स्तर पर होने वाली सभी सरकारी खरीद में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। इसके लिए वर्ल्ड बैंक की मदद से बनाए गए इलेक्ट्रॉनिक पाकिस्तान एक्विजिशन एंड डिस्पोजल सिस्टम (ई-पैड्स) सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।

इस बीच, पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक हालत फिर से चर्चा में आ गई है। खासकर बदलते वैश्विक हालात के बीच। एक तरफ पाकिस्तान खुद को दुनिया में शांति की आवाज के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन अंदर से उसकी आर्थिक स्थिति काफी दबाव में है।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान पाकिस्तान ने कूटनीतिक कोशिशें कीं, लेकिन उसी समय उसकी आर्थिक कमजोरी भी सामने आ गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने पाकिस्तान से अपने 3.5 अरब डॉलर के जमा पैसे वापस ले लिए, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर तुरंत दबाव बढ़ गया।

हालांकि महंगाई कुछ हद तक कम हुई है, लेकिन आईएफएफ की सलाह पर ब्याज दरें अभी भी ज्यादा हैं। इससे निवेश और निर्यात दोनों प्रभावित हो रहे हैं, और अर्थव्यवस्था धीमी रफ्तार में फंसी हुई है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान की बाहरी आर्थिक स्थिति अभी भी काफी कमजोर बनी हुई है।