Monday, July 27, 2026
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100 करोड़ रुपए से अधिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या 5 साल में 300 प्रतिशत बढ़ी: सरकार

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नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। देश में 100 करोड़ रुपए से अधिक की वार्षिक आय घोषित करने वाले आयकरदाताओं की संख्या पिछले 5 वर्षों में लगभग चार गुना हो गई है। केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद में बताया कि आकलन वर्ष 2025-26 में 576 लोगों ने अपनी वार्षिक आय 100 करोड़ रुपए से अधिक घोषित की, जबकि आकलन वर्ष 2021-22 में यह संख्या 142 थी। इस तरह पांच वर्षों में ऐसे उच्च आय वाले करदाताओं की संख्या में करीब 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि आकलन वर्ष 2022-23 में 100 करोड़ रुपए से अधिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या 301 थी। इसके बाद आकलन वर्ष 2023-24 में यह मामूली घटकर 284 रह गई, लेकिन आकलन वर्ष 2024-25 में बढ़कर 415 हो गई और आकलन वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 576 तक पहुंच गई।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आयकर अधिनियम, 2025 के तहत ‘अरबपति’ शब्द की कोई वैधानिक परिभाषा नहीं है। इसलिए सरकार ने आयकर रिटर्न के आधार पर केवल उन व्यक्तियों का आंकड़ा साझा किया है, जिन्होंने अपनी वार्षिक आय 100 करोड़ रुपए से अधिक घोषित की है।

आय असमानता से जुड़े एक प्रश्न के जवाब में सरकार ने कहा कि हालिया आंकड़े देश में आय वितरण और रोजगार की स्थिति में सुधार का संकेत देते हैं।

सरकार ने हाउसहोल्ड कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर सर्वे (एचसीईएस) 2023-24 का हवाला देते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जिनी गुणांक घटकर 0.237 रह गया है, जो 2022-23 में 0.266 था। वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह 0.314 से घटकर 0.284 हो गया है। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच आय असमानता का अंतर कम होने का संकेत मिलता है।

सरकार ने श्रम बाजार की स्थिति में भी सुधार का दावा किया। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए बेरोजगारी दर 2023-24 में घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई है।

सरकार ने कहा कि वह आय असमानता को कम करने के लिए प्रगतिशील कर व्यवस्था, रोजगार सृजन कार्यक्रमों और स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास तथा ग्रामीण विकास पर सार्वजनिक खर्च बढ़ाने जैसे कदम उठा रही है। इसके साथ ही बुनियादी ढांचा विकास पर आधारित निवेश और लक्षित कर प्रोत्साहनों के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।