भुवनेश्वर, 25 सितंबर (आईएएनएस)। ओडिशा कांग्रेस ने शुक्रवार को चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर भुवनेश्वर में प्रदर्शन किया और ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय का घेराव किया। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की।
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एडीएम कार्यालय से सीईओ कार्यालय तक मार्च निकाला और वहां प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बात करते हुए दास ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से लगाए गए कथित ‘वोट चोरी’ के आरोप अब सही साबित हो गए हैं।
भक्त चरण दास ने कहा, ”आज से नहीं, बल्कि पिछले तीन वर्षों से राहुल गांधी कह रहे हैं कि ‘वोट चोरी’ हो रही है। उनके आरोप सही साबित हुए हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश की चुनाव प्रक्रिया में कथित ‘वोट चोरी’ के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में कर रही है। भक्त चरण दास ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने सरकार के प्रतिनिधि की तरह काम करते हुए देशभर में खामियों वाली विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया की निगरानी की और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हुई।
भक्त चरण दास ने आगे आरोप लगाया कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनाव आयोग के अलग-अलग फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई, लेकिन ज्ञानेश कुमार ने उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए एकतरफा फैसले लेना जारी रखा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने एक ही दिन चार बार आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया। दास के मुताबिक, दोनों आयुक्तों को आयोग के महत्वपूर्ण मॉड्यूल, जानकारियों और फैसलों के बारे में मीडिया के जरिए पता चला, जिससे संकेत मिलता है कि उन्हें इन मामलों की जानकारी नहीं दी गई थी।
भक्त चरण दास ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नए मतदाताओं के नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में अवैध तरीके से बदलाव किया गया, जबकि आयोग के पास कथित तौर पर ऐसा करने का अधिकार नहीं था। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी आपत्ति को नजरअंदाज कर दिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कई बैठकों के एजेंडे पहले से सार्वजनिक नहीं किए गए और बाद में उनकी कार्यवाही की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई।
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ने कैबिनेट सचिव को लिखे गए उन पत्रों का भी जिक्र किया, जिनमें उनके अनुसार दोनों मौजूदा चुनाव आयुक्तों ने आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 का उल्लंघन किया।
भक्त चरण दास ने सवाल उठाया कि दोनों मौजूदा चुनाव आयुक्तों को अपनी बात रखने के लिए आयोग के बाहर मामला क्यों उठाना पड़ा और मुख्य चुनाव आयुक्त को कथित तौर पर कानून के खिलाफ काम करने के लिए शुरुआत में किसने राजनीतिक संरक्षण दिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार जवाबदेही के सवाल से खुद को अलग नहीं कर सकती।
आयोग में मतभेद के बावजूद फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने संबंधी चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण की आलोचना करते हुए दास ने इसे ‘बेहद हास्यास्पद’ बताया।
भक्त चरण दास ने राहुल गांधी के उस बयान को भी दोहराया, जिसमें मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर करने वाले अधिकारियों को ‘गद्दार’ कहा गया था। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उनके खिलाफ महाभियोग की मांग की। साथ ही उन्होंने प्रियंका गांधी की ओर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग का भी जिक्र किया।
