Wednesday, July 15, 2026
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दिल्ली में ‘ओल्ड क्लोथ्स डोनेशन प्रोजेक्ट’ शुरू, सीएम रेखा गुप्ता की मौजूदगी में हुआ समझौता

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नई दिल्ली, 14 जुलाई (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी में मंगलवार को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन और डीएमआरसी लेडीज वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन ने पुराने और इस्तेमाल किए गए कपड़ों के संग्रह और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) के लिए दिल्ली सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

डीएमआरसी और डीएलडब्ल्यूओ ने यह समझौता दिल्ली सरकार के स्टेट अर्बन लाइवलीहुड मिशन और वस्त्र पुनर्चक्रण से जुड़ी संस्थाओं क्लोथ्स बॉक्स फाउंडेशन तथा रेस्पन के साथ किया।

इस साझेदारी के तहत दिल्ली में ‘ओल्ड क्लोथ्स डोनेशन प्रोजेक्ट’ शुरू किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य पुराने और इस्तेमाल किए गए कपड़ों को कूड़े के ढेर (लैंडफिल) में जाने से रोकना, कपड़ा कचरे को कम करना और रीसाइक्लिंग तथा अपसाइक्लिंग के जरिए सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार पर्यावरण संरक्षण, प्रभावी कचरा प्रबंधन और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल कपड़ा कचरे को कम करने में मदद करेगी, बल्कि लोगों को स्वच्छ और टिकाऊ दिल्ली बनाने में सक्रिय भागीदार बनने के लिए भी प्रेरित करेगी।

इस मौके पर डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक विकास कुमार और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

परियोजना के तहत ‘अर्पण’ नाम से संग्रह केंद्र दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर स्थापित किए जाएंगे, जहां लोग अपने घरों के पुराने और अनुपयोगी कपड़े दान कर सकेंगे। इसके अलावा रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग से बने उत्पादों की बिक्री के लिए कियोस्क भी लगाए जाएंगे।

पहले चरण में अगले कुछ दिनों के भीतर शाहदरा, डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल, मालवीय नगर, हौज खास, द्वारका, मोहन एस्टेट, लाजपत नगर, मयूर विहार फेज-1, पंजाबी बाग वेस्ट और शालीमार बाग मेट्रो स्टेशनों पर अर्पण केंद्र शुरू किए जाएंगे। लोग सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक यहां कपड़े दान कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि एकत्रित कपड़ों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा।

पहली श्रेणी में वे कपड़े होंगे जिन्हें स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बैग, सजावटी सामान और अन्य उपयोगी वस्तुओं में बदल सकेंगी।

दूसरी श्रेणी में वे कपड़े होंगे जो पूरी तरह उपयोग लायक नहीं हैं। ऐसे कपड़ों को रीसाइक्लिंग के जरिए नए उत्पादों और कच्चे माल में बदला जाएगा।

इसके अलावा धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल किए गए कपड़ों और अन्य पवित्र सामग्री का भी सम्मानपूर्वक पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण किया जाएगा, ताकि लोगों की भावनाओं का सम्मान बना रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार टूटी-फूटी मूर्तियों, प्लास्टिक कचरे और अन्य प्रकार के कचरे के लिए भी अलग समाधान विकसित कर रही है।

उन्होंने विश्वास जताया कि यदि हर प्रकार के कचरे के लिए वैज्ञानिक और व्यवस्थित समाधान तैयार किए जाएं, तो दिल्ली को कई जटिल समस्याओं से मुक्त किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि फिलहाल 10 अर्पण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, लेकिन भविष्य में इस पहल का विस्तार पूरे दिल्ली में किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना कपड़ा प्रदूषण कम करने, टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने और महिलाओं के लिए नए रोजगार अवसर पैदा करने की दिशा में एक अभिनव कदम है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती है, जहां पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास साथ-साथ आगे बढ़ें।

सरकारी बयान के अनुसार, इन संग्रह केंद्रों का संचालन स्टेट अर्बन लाइवलीहुड मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं करेंगी।

उन्हें कपड़ों की अपसाइक्लिंग और रीसाइक्लिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

दान किए गए कपड़ों का एक हिस्सा उन्हें अपसाइक्लिंग के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा।

क्लोथ्स बॉक्स फाउंडेशन और रेस्पन एकत्रित कपड़ों की छंटाई, रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग की पूरी प्रक्रिया का संचालन करेंगे।

इन केंद्रों पर रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग से बने उत्पादों की बिक्री भी की जाएगी, जिससे सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल को बढ़ावा मिलेगा।