Sunday, June 21, 2026
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बलूचिस्तान में फर्जी मुठभेड़ में हत्या, दो महिलाओं के जबरन गायब किए जाने का आरोप

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क्वेटा, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। बलूचिस्तान में नागरिकों के खिलाफ हिंसा जारी रहने के बीच प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने एक व्यक्ति की कथित गैर-न्यायिक हत्या और दो महिलाओं के जबरन गायब किए जाने के मामले उठाए हैं। इन घटनाओं के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर आरोप लगाए गए हैं।

बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद (एचआरसीबी) ने बताया कि केच जिले के तुंप क्षेत्र निवासी आमिर नूर को 28 अप्रैल को पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड ने गोली मार दी। वह अपनी पत्नी और बहन के साथ इलाज के लिए कराची जा रहे थे।

संगठन के अनुसार रास्ते में बस को रोककर हथियारबंद लोगों ने आमिर नूर को नीचे उतारा और उन पर गोलीबारी कर दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले में उनकी पत्नी और बहन भी घायल हुईं।

एचआरसीबी ने दावा किया कि आमिर नूर को 4 नवंबर 2024 को पाकिस्तानी बलों ने जबरन हिरासत में लिया था और लंबे समय तक बंदी बनाए रखने के बाद 24 अप्रैल 2026 को रिहा किया गया था।

मानवाधिकार संगठन ने चिंता जताते हुए कहा कि जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच 11 लोगों को जबरन गायब किए जाने के बाद रिहाई मिलने पर निशाना बनाया गया। इनमें से 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति हमले में बच गया।

संगठन ने कहा कि इन घटनाओं को स्थानीय डेथ स्क्वॉड ने अंजाम दिया, जिससे रिहाई के बाद भी लगातार उत्पीड़न को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।

वहीं बलूच महिला फोरम (बीडब्ल्यूएफ) ने बलूचिस्तान में महिलाओं के जबरन गायब किए जाने की लगातार मिल रही खबरों पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि इससे लोगों में डर, अनिश्चितता और मानसिक तनाव बढ़ा है।

फोरम ने हालिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि केच जिले के तेजाबान इलाके में मंगलवार देर रात छापेमारी के दौरान दो बलूच महिलाओं- जुबैदा और उनकी बहू जरनाज को पाकिस्तानी बलों ने हिरासत में ले लिया। तब से उनका कोई पता नहीं चल सका है।

संगठन ने बताया कि इससे पहले जुबैदा के बेटे दौलत की 18 फरवरी को पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड द्वारा हत्या किए जाने का आरोप है। अब उनकी मां और पत्नी के गायब होने से परिवार की पीड़ा और बढ़ गई है।

बलूच महिला फोरम ने कहा कि जबरन गायब किया जाना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है और यह बुनियादी मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। संगठन ने संबंधित संस्थाओं से तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की मांग की है, ताकि ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें और प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।