Sunday, June 14, 2026
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जम्मू-कश्मीर के राजौरी के घने जंगलों में आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन 23वें दिन भी जारी

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जम्मू, 14 जून (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकवाद-विरोधी अभियान रविवार को 23वें दिन भी जारी रहा।

राजौरी जिले के गंभीर मुगलान इलाके के घने डोरीमल जंगलों में ‘ऑपरेशन शेरावाली’ चलाया जा रहा है। यह इस इलाके में सबसे लंबे समय से चल रहे आतंकवाद-विरोधी अभियानों में से एक है।

सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टुकड़ियों ने मुश्किल और ऊबड़-खाबड़ जंगली इलाकों में अपने ऑपरेशन तेज कर दिए हैं।

यह ऑपरेशन डोरीमल की घनी जंगली पहाड़ियों में चलाया जा रहा है, जहां खड़ी ढलान, पथरीले पहाड़ और घनी वनस्पति जमीन पर मौजूद सैनिकों के लिए बड़ी चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।

मुश्किल हालात के बावजूद, सुरक्षाकर्मी पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी, अतिरिक्त निगरानी और इलाके पर नियंत्रण बनाए रखने के उपाय कर रहे हैं।

लंबे समय से चल रहे तलाशी अभियान सीमावर्ती जिले में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों के पक्के इरादे को दिखाते हैं।

इससे पहले, 7 जून को ‘ऑपरेशन शेरावाली’ के दौरान एक चट्टान से गलती से फिसलने के कारण भारतीय सेना के एक जवान की मौत हो गई थी।

सूत्रों के मुताबिक, वह आतंकवाद-विरोधी अभियान के दौरान ऊबड़-खाबड़ और मुश्किल पहाड़ी इलाके से गुजर रहे थे, तभी उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पथरीली ढलान पर फिसल गया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं।

घटना के बाद घायल जवान को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में चोटों के कारण उसकी मौत हो गई।

28 मई को राजौरी के डोरीमल जंगल इलाके में भारी गोलीबारी शुरू हुई, जब ‘ऑपरेशन शेरावाली’ एक अहम चरण में पहुंच गया था। सुरक्षा बलों ने घने इलाके में छिपे संदिग्ध आतंकवादियों को खत्म करने के लिए घेराबंदी कड़ी कर दी थी।

अधिकारियों के मुताबिक, मुठभेड़ वाली जगह पर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई, साथ ही अतिरिक्त मदद और लॉजिस्टिकल सपोर्ट भी भेजा गया, ताकि एक मजबूत और अभेद्य घेरा बनाया जा सके और घने जंगल की आड़ में आतंकवादियों को भागने से रोका जा सके।

यह ऑपरेशन घने जंगलों में बड़े पैमाने पर आतंकवाद-विरोधी तलाशी अभियान है, जो मई के आखिर में शुरू हुआ था।

कई एजेंसियों के इस ऑपरेशन का मकसद इलाके के ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाकों में छिपे हथियारों से लैस घुसपैठियों का पता लगाना और उन्हें खत्म करना है।

जम्मू क्षेत्र के राजौरी और पुंछ जिले आतंकवादी गतिविधियों के लिए एक बहुत संवेदनशील और प्रमुख केंद्र के तौर पर फिर से उभरे हैं। ये जिले पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के साथ नियंत्रण रेखा (एलओसी) का एक लंबा और खुला हिस्सा साझा करते हैं।

2019 से पहले, इस इलाके को काफी हद तक आतंकवाद-मुक्त घोषित कर दिया गया था। हालांकि, भारी हथियारों से लैस आतंकी समूह ने घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ इलाकों और प्राकृतिक गुफाओं का इस्तेमाल सुरक्षित ठिकानों के तौर पर करके फिर से अपनी पकड़ बनाने की कोशिश की है। हाल के वर्षों में, सुरक्षा बलों को बार-बार घात लगाकर किए गए हमलों का सामना करना पड़ा है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर इलाके पर नियंत्रण करने और घेराबंदी व तलाशी अभियान चलाने पड़े हैं।