मुंबई, 8 जुलाई (आईएएनएस)। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम क्षेत्र में शिवसेना के एक नगरसेवक द्वारा महिला डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ गठबंधन पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, राज्य सरकार के मंत्रियों ने भी इस घटना की निंदा करते हुए इसे अस्वीकार्य बताया और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
आदित्य ठाकरे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “मैंने सरकार और मुख्यमंत्री से मांग की है कि नगरसेवक रमेश म्हात्रे को सिर्फ गिरफ्तार ही नहीं किया जाए, बल्कि उन्हें नगरसेवक पद से भी अयोग्य घोषित किया जाए। उन्हें कल्याण और डोंबिवली में घुमाया जाए, ताकि लोगों को संदेश मिले कि किसी पर भी हमला नहीं किया जा सकता, खासकर डॉक्टरों और नर्सों पर, चाहे वे महिला हों या पुरुष।”
रोहित पवार ने इस घटना को ‘गुंडागर्दी’ करार देते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोग ही इस तरह के व्यवहार को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “डॉक्टर के साथ जो हुआ वह पूरी तरह गलत है। डॉक्टर ने स्पष्ट बताया था कि अस्पताल में जगह उपलब्ध नहीं है। गर्भवती महिला और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता था, इसलिए डॉक्टर ने परिवार को अस्थायी रूप से किसी निजी अस्पताल में जाने की सलाह दी थी। इसके बाद सत्ताधारी दल का एक नगरसेवक अस्पताल में घुसा और महिला डॉक्टरों तथा कर्मचारियों के साथ मारपीट की। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और डॉक्टरों के साथ खड़े हैं।”
नाना पटोले ने कहा कि भारी बहुमत मिलने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन में अहंकार आ गया है। उन्होंने कहा, “उन्हें लगता है कि वे हमेशा सत्ता में रहेंगे और शासकों की तरह व्यवहार करने लगे हैं। यही अहंकार इतना बढ़ गया कि महिला डॉक्टर और नर्सों पर हमला किया गया। यह सावित्रीबाई फुले और छत्रपति शिवाजी महाराज की धरती है, जहां महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च माना जाता है। हम इस मुद्दे को उठाएंगे और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग करेंगे।”
असलम शेख ने आरोप लगाया कि सरकार सत्ता के नशे में चूर है। उन्होंने कहा, “यदि सरकारी अस्पताल में सुविधाओं की कमी है तो उसे दूर करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन सुविधाएं बढ़ाने के बजाय महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों को डराने का काम किया जा रहा है। यह बेहद शर्मनाक है।”
सरोज आहिरे ने कहा कि किसी भी शिकायत का समाधान कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं इस घटना की निंदा करती हूं। किसी महिला पर हाथ उठाना बिल्कुल गलत है। यदि किसी को शिकायत है तो वह संबंधित अधिकारियों, उपमुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री के पास जा सकता है।”
महाराष्ट्र की मंत्री मेघना बोर्डीकर ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी जनप्रतिनिधि को ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को बेहतर उपचार देने के लिए लगातार काम करते हैं। इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए कदम उठाए जाएंगे।
मंत्री प्रकाशराव अबितकर ने कहा कि सभी को आचार संहिता का पालन करना चाहिए और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
वहीं, मंत्री योगेश कदम ने कहा कि यदि डॉक्टरों पर हमला हुआ है तो यह पूरी तरह गलत और अस्वीकार्य है। किसी भी शिकायत को संबंधित विभाग के सामने उठाया जाना चाहिए, हिंसा इसका समाधान नहीं है।
शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई वीडियो नहीं देखा जिसमें नगरसेवक रमेश म्हात्रे महिला डॉक्टर को मारते हुए दिखाई दे रहे हों।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि कुछ कर्मचारियों में यह सोच होती है कि मरीजों को इलाज मिले या नहीं, उन्हें वेतन तो मिलता ही रहेगा।
बता दें कि यह घटना 6 जुलाई को हुई थी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, डॉक्टरों ने एक गर्भवती महिला के परिजनों को बताया था कि नवजात शिशु को जन्म के बाद एनआईसीयू (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) में भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन अस्पताल के सभी एनआईसीयू बेड पहले से भरे हुए थे।
डॉक्टरों ने परिजनों को ऐसे अस्पताल में जाने की सलाह दी, जहां एनआईसीयू की सुविधा उपलब्ध हो। इसी बात को लेकर विवाद हुआ।
सीसीटीवी फुटेज में कुछ लोग नगरसेवक के साथ अस्पताल के एक कमरे में घुसते दिखाई देते हैं और कथित तौर पर डॉक्टरों व कर्मचारियों के साथ मारपीट करते नजर आते हैं। यह हमला तीन मिनट से अधिक समय तक चला।
वीडियो में एक महिला डॉक्टर अपने मोबाइल फोन से किसी को कॉल करने की कोशिश करती दिखाई देती हैं। इसी दौरान कथित तौर पर नगरसेवक ने पीछे से उन पर हमला किया, जिससे उनका मोबाइल हाथ से गिर गया। इसके बाद अन्य अस्पताल कर्मचारियों के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है।
इस घटना की राजनीतिक दलों और चिकित्सा समुदाय ने कड़ी निंदा की है तथा दोषियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

