टोरंटो, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (पीटीएम) प्रमुख मंजूर पश्तीन ने पाकिस्तान की सेना पर पश्तून इलाकों में लोगों की हत्या, उन्हें जबरन गायब करने और संसाधनों की लूट-खसोट का आरोप लगाया है। साथ ही, उन्होंने विदेशों में रह रहे पश्तूनों से अपील की कि वे इस्लामाबाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की दिशा में काम करें।
टोरंटो में पीटीएम कनाडा की ओर से आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए पश्तीन ने कहा, “यह देश पश्तूनों और अफगानों का खून पानी की तरह बहा रहा है। इसने हमारे संसाधनों को लूटा है और हमारी मातृभूमि को बर्बाद कर दिया है।”
पीटीएम नेताओं अली वजीर और हाजी समद की कैद का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सेना की “निजी जेलों” में अभी भी कई पश्तून कैद हैं।
पश्तीन ने पाकिस्तान के लोकतंत्र को महज एक दिखावा बताया और आतंकवाद के खिलाफ सेना के तर्कों पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने पूछा, “इसकी संसद को ही देख लीजिए: सेना जिसे चाहे अंदर लाती है और जिसे चाहे बाहर निकाल देती है। ऐसी व्यवस्था में उम्मीदें पालना समय की बर्बादी है। यह कैसा अजीब आतंकवाद है जो पंजाब में तो नहीं है, लेकिन पख्तूनख्वा में ही आतंकवाद की साजिशें लागू की जाती हैं?” उन्होंने पश्तूनों, बलोचों, सिंधियों और कश्मीरियों को “साझा दुश्मन” के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।
‘पाकिस्तान के अत्याचारों का पर्दाफाश’ (अनमास्किंग पाकिस्तान्स एट्रोसिटीज) नाम के इस सम्मेलन में सैकड़ों लोग शामिल हुए। इसमें एक घोषणापत्र अपनाया गया, जिसमें संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की देखरेख में एक स्वतंत्र ‘सत्य और समाधान आयोग’ (ट्रुथ एंड रिकॉन्सिलिएशन कमीशन) बनाने; गुमशुदा लोगों को ढूंढ निकालने; अवैध रूप से हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने; पीटीएम पर लगे प्रतिबंध हटाने; और जमीन तथा प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों का नियंत्रण सुनिश्चित करने की मांग की गई।
अफगानिस्तान में कनाडा के पूर्व राजदूत क्रिस अलेक्जेंडर ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व पर आरोप लगाया कि वह प्रॉक्सी (प्रतिनिधियों) और आतंकवाद के जरिए अफगानिस्तान पर अपना दबदबा बनाना चाहता है।
उन्होंने कहा, “हिंसा खत्म करें। यही हर समस्या का समाधान है।”
अफगानिस्तान की संसद की पूर्व सदस्य और कनाडा में पूर्व राजदूत शिनकाई कारोखैल ने कहा कि पाकिस्तान एक तरफ आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो दूसरी तरफ खुद को ही इसका पीड़ित बताता है। उन्होंने कहा कि अफगान पाकिस्तान के अत्याचारों के दस्तावेजी सबूत हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश करेंगे।
पीटीएम की स्थापना 2014 में हुई थी। इसने पाकिस्तान में न्यायेतर हत्याओं (एक्स्ट्राज्यूडिशियल किलिंग्स) और लोगों को गायब करने के खिलाफ अभियान चलाया है। अक्टूबर 2024 में, पाकिस्तान ने तथाकथित ‘आतंकवाद-रोधी कानून’ (एंटी-टेररिज्म एक्ट) के तहत पीटीएम पर प्रतिबंध लगा दिया था।
