Sunday, June 7, 2026
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पाकिस्तान में मल्टीपल स्क्लेरोसिस मरीजों की बढ़ी चिंता, महंगे इलाज और आधुनिक सुविधाओं की कमी से जूझ रहे रोगी

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इस्लामाबाद, 7 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मल्टीपल स्क्लेरोसिस (एमएस) से पीड़ित मरीजों ने इलाज की बढ़ती लागत और आधुनिक उपचार सुविधाओं की कमी को लेकर चिंता जताई है। मरीजों और उनके परिजनों ने सरकार से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि युवा मरीजों को रोकी जा सकने वाली विकलांगता से बचाया जा सके।

पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों का अनुमान है कि पाकिस्तान में एमएस से पीड़ित मरीजों की संख्या 12,000 से 14,000 के बीच है, हालांकि इस बीमारी से संबंधित कोई व्यापक राष्ट्रीय आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एक मरीज के इलाज पर सालाना लगभग 10 लाख पाकिस्तानी रुपये तक खर्च आ सकता है। कुछ मरीज प्रांतीय सेहत कार्ड कार्यक्रम के तहत इलाज करवा रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों और मरीजों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का कहना है कि इस योजना के तहत मिलने वाली राशि इलाज की पूरी लागत को कवर नहीं करती।

इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में आधुनिक उपचार सुविधाओं का भी अभाव है। पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिलने के कारण कई मरीज बीच में ही इलाज बंद करने को मजबूर हो जाते हैं। न्यूरोलॉजिस्ट्स का कहना है कि इससे बीमारी तेजी से बढ़ सकती है और मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी पर हमला करने लगती है। इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं और यह नसों को हुए नुकसान की गंभीरता पर निर्भर करते हैं।

इस बीमारी के सामान्य लक्षणों में दृष्टि संबंधी समस्याएं, अत्यधिक थकान, चलने और संतुलन बनाए रखने में कठिनाई, हाथ-पैरों में सुन्नपन या कमजोरी शामिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, एमएस के सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन परिवार में किसी को यह बीमारी होने पर जोखिम बढ़ सकता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन उपचार के जरिए लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है, बीमारी के दोबारा उभरने की संभावना कम की जा सकती है और मरीज के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल महीने में पाकिस्तान के खुले बाजार और रावलपिंडी के दवा केंद्र बोहर बाजार में कई दवाओं की कीमतों में 50 प्रतिशत से लेकर 500 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई।

मधुमेह, उच्च रक्तचाप, एंटीबायोटिक, पेट संबंधी बीमारियों और खांसी की दवाओं के दाम भी काफी बढ़ गए हैं। इंसुलिन इंजेक्शन डिवाइस की कीमत 2,200 पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर 4,720 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गई है।

आलोचकों ने इस मूल्य वृद्धि को आम लोगों के लिए “असहनीय” बताते हुए कहा है कि 2,000 से 5,000 रुपये तक की कीमत वाले इंसुलिन उपकरण कम आय वाले मरीजों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप कर आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने की मांग की है।