बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के खिलाफ प्रदर्शन तेज, परिवारों ने की रिहाई की मांग

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क्वेटा, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में जबरन गुमशुदगी के मामलों को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं। केच जिले के सहाकी बलगतार इलाके में एक बलोच परिवार ने सोमवार को चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे हाईवे पर धरना दिया और अपने लापता परिजन की सुरक्षित रिहाई की मांग की।

बलोच यकजहती कमेटी के अनुसार, 24 वर्षीय किसान आबिदीन को रविवार शाम किलखोर रोड से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों द्वारा कथित तौर पर उठाया गया था। परिवार का कहना है कि तब से उसकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।

बीवाईसी ने कहा कि यह प्रदर्शन जबरन गुमशुदगी को खत्म करने और बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की मांग को लेकर किया जा रहा है। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रांत में हर दिन कई लोग या तो गायब हो रहे हैं या मारे जा रहे हैं।

‘बलोच वॉइस फॉर जस्टिस’ ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि जबरन गुमशुदगी को दमन के औजार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन है और पीड़ित परिवारों को न्याय से वंचित करता है।

इस बीच, बलोच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ ने खुलासा किया कि 19 अप्रैल की रात ग्वादर जिले के पनवान इलाके में सुरक्षा बलों ने छापेमारी कर चार अन्य लोगों को भी जबरन उठा लिया। इनमें 19 वर्षीय मछुआरे सोहेल करीम, 20 वर्षीय छात्र नादिल बलोच, 14 वर्षीय छात्र दिलशाद दाद और एक अन्य युवक अली फजल शामिल हैं।

पांक ने 18 अप्रैल को केच जिले से 27 वर्षीय छात्र इकराम के कथित अपहरण की भी निंदा की और कहा कि छात्रों को निशाना बनाना बेहद चिंताजनक है।

इसके अलावा 17 अप्रैल की रात केच के शापक इलाके से युवा गायक मोहम्मद ताज को भी सुरक्षा बलों द्वारा घर से उठाए जाने का मामला सामने आया है। पांक ने कहा कि ताज का कोई पता नहीं है और यह घटना क्षेत्र में सांस्कृतिक और कलात्मक अभिव्यक्ति के लिए घटती जगह को दर्शाती है।

मानवाधिकार संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन घटनाओं का संज्ञान लेने और लापता लोगों की तत्काल रिहाई सुनिश्चित कराने की मांग की है।