Sunday, July 26, 2026
SGSU Advertisement
Home अंतर्राष्ट्रीय अमेरिका-ईरान के बीच तनाव खत्म कराने की कोशिश पाकिस्तान की बड़ी आर्थिक...

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव खत्म कराने की कोशिश पाकिस्तान की बड़ी आर्थिक जरूरत: रिपोर्ट

0
24

नई दिल्ली, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की कोशिशें, किसी तरह अमेरिका और ईरान के बीच टकराव खत्म हो जाए, सिर्फ राजनीतिक रणनीति नहीं हैं, बल्कि इसकी एक बड़ी आर्थिक जरूरत भी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर पाकिस्तान इस मामले में सफलतापूर्वक बीच-बचाव कर पाता है तो तेल और गैस की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का खतरा कम हो सकता है, बिजली सेक्टर पर दबाव घटेगा, खाड़ी देशों के साथ रिश्ते स्थिर रहेंगे और ईरान के साथ व्यापार के नए मौके खुल सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर है, खासकर खाड़ी देशों के साथ उसके रिश्तों पर। साथ ही वह अभी भी आईएमएफ के बेलआउट प्रोग्राम के तहत काम कर रहा है।

पाकिस्तान ने यह मध्यस्थता की कोशिश ऐसे समय में शुरू की है जब वह सात अरब डॉलर के आईएमएफ प्रोग्राम पर निर्भर है, और उसका केंद्रीय बैंक जून के अंत तक विदेशी मुद्रा भंडार को लगभग 18 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रख रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया क‍ि यह एक बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसमें काफी संभावनाएं हैं, लेकिन यह बाहरी झटकों के प्रति बहुत संवेदनशील भी है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश के कुल आयात में तेल की हिस्सेदारी 16.64 प्रतिशत थी।

रिपोर्ट में बताया गया क‍ि इसका मतलब है कि तेल की कीमत बढ़ने या सप्लाई में रुकावट आने से सीधे महंगाई और रुपया पर असर पड़ता है। जो सरकार कीमतों को स्थिर करने और आर्थिक भरोसा बहाल करने की कोशिश कर रही है, उसके लिए क्षेत्रीय ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) के मामले में भी पाकिस्तान खाड़ी देशों, खासकर कतर पर काफी निर्भर है, और मौजूदा तनाव ने इस कमजोरी को उजागर कर दिया है।

इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में बिजली की कमी बढ़कर करीब 3,400 मेगावाट तक पहुंच गई है, और उत्तरी पाकिस्तान के कुछ इलाकों में रोजाना सात घंटे तक बिजली कटौती हो रही है।

पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने माना है कि ईरान के साथ औपचारिक बैंकिंग चैनल की कमी के कारण कुछ लेन-देन अभी भी बार्टर (सामान के बदले सामान) के जरिए होते हैं, इसलिए पाकिस्तान का साफ हित है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव लंबे संघर्ष में न बदले।