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पाकिस्तान में गरीबी दर छह साल में 6.4 प्रतिशत बढ़ी, आर्थिक संकट और बाढ़ का असर

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नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान में वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच तीन डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के आधार पर गरीबी दर में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कोविड-19 महामारी, 2022 की विनाशकारी बाढ़ और व्यापक आर्थिक संकट को इसके प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र (मेनाप) की अत्यंत गरीब आबादी में पाकिस्तान की हिस्सेदारी लगभग आधी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मेनाप दुनिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां गरीबी का स्तर महामारी से पहले के स्तर से ऊपर बना हुआ है और इसमें लगातार वृद्धि हो रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में प्रतिदिन तीन डॉलर से कम पर गुजारा करने वाले लोगों में लगभग 48 प्रतिशत पाकिस्तान में रहते हैं। वहीं, अफगानिस्तान, सीरिया और यमन की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 47 प्रतिशत है।

सबसे हालिया अनुमानों के अनुसार, जिबूती, पाकिस्तान, सीरिया और यमन में तीन डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली आबादी का अनुपात 20 प्रतिशत के करीब पहुंच गया है या उससे अधिक हो गया है।

रिपोर्ट में क्षेत्रीय और वैश्विक गरीबी के आंकड़ों की तुलना भी की गई है। वर्ष 2024 में मेनाप क्षेत्र की 14.3 प्रतिशत आबादी प्रतिदिन तीन डॉलर से कम पर जीवनयापन कर रही थी, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 10.4 प्रतिशत था। इसी तरह, प्रतिदिन 4.20 डॉलर से कम पर गुजारा करने वाली आबादी का अनुपात मेनाप क्षेत्र में 26.9 प्रतिशत और दुनिया भर में 18.9 प्रतिशत रहा।

रिपोर्ट में पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर में धीरे-धीरे सुधार का अनुमान जताया गया है। इसके अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान की अनुमानित जीडीपी वृद्धि दर 3.2 प्रतिशत रही, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 3.7 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026-27 में 3.8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में सेवा क्षेत्र को भी आर्थिक वृद्धि के अनुमान से जोड़ा गया है।

वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पाकिस्तान का चालू खाता घाटा जीडीपी के 0.1 प्रतिशत और राजकोषीय घाटा 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।

रिपोर्ट में खाद्य असुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। कब्जे वाले वेस्ट बैंक और गाजा के साथ यमन में खाद्य संकट विशेष रूप से गंभीर बना हुआ है। इसके अलावा अफगानिस्तान, जिबूती, लेबनान और पाकिस्तान में भी खाद्य असुरक्षा का दबाव देखा जा रहा है।

रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि वर्ष 2026 के अंत में सामान्य से अधिक मजबूत अल नीनो मौसमी स्थिति बनने की आशंका खाद्य कीमतों पर दबाव और बढ़ा सकती है। इससे गरीब और कमजोर तबकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महामारी, प्राकृतिक आपदाओं और आर्थिक संकट के संयुक्त प्रभावों ने क्षेत्र में गरीबी की समस्या को और गंभीर बनाया है। पाकिस्तान में गरीबी दर में वृद्धि इसी व्यापक संकट का एक प्रमुख उदाहरण है।