Wednesday, August 12, 2026
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तमिलनाडु: पीएपी के तहत किसानों ने की नहरों की मरम्मत के लिए 14.98 करोड़ रुपए जारी करने की मांग

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कोयंबटूर, 12 अगस्त (आईएएनएस)। परम्बिकुलम-अलियार प्रोजेक्ट (पीएपी) पर निर्भर किसानों ने तमिलनाडु सरकार से सिंचाई नहरों की सफाई और मरम्मत के लिए तुरंत 14.98 करोड़ रुपए जारी करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि कमजोर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के बीच नहरों के खराब रखरखाव से पानी की भारी बर्बादी हो सकती है।

परम्बिकुलम-अलियार प्रोजेक्ट (पीएपी) के तहत पानी इस्तेमाल करने वाले संगठनों ने पूरे सिंचाई नेटवर्क में नहरों की मरम्मत के 229 काम चिह्नित किए हैं।

यह प्रोजेक्ट कोयंबटूर, तिरुप्पुर और इरोड जिलों में फैली लगभग 3.80 लाख एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई करता है। इसके लिए एक बड़े नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे मुख्य रूप से तिरुमूर्ती और अलियार बांधों से पानी मिलता है।

तिरुमूर्ति जलाशय प्रणाली के तहत, दो जोन में हर साल लगभग 1.90 लाख एकड़ जमीन की सिंचाई होती है, जिसमें हर जोन में लगभग 95,000 एकड़ जमीन शामिल है। इस साल, जोन 2 और 3 में आने वाली कृषि भूमि को पानी की आपूर्ति की जानी है। इसके अलावा, अलियार जलाशय प्रणाली हर साल लगभग 25,000 एकड़ जमीन की सिंचाई करता है।

किसानों का कहना है कि नहरों की क्षमता बनाए रखने और जलाशयों से छोड़े गए पानी को बिना किसी अनावश्यक बर्बादी के आखिरी छोर तक के कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए हर साल सफाई और खरपतवार हटाने का काम जरूरी है।

इस प्रोजेक्ट में 150 संगठन हैं, जिसमें 134 तिरुमूर्ति जलाशय प्रणाली के तहत और 16 तिरुमूर्ति जलाशय प्रणाली के तहत आते हैं। इन संगठनों का कहना है कि उनके पास बड़े पैमाने पर रखरखाव का काम खुद करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं और इसलिए वे सरकारी मदद पर निर्भर हैं।

तिरुमूर्ति जलाशय प्रोजेक्ट कमेटी के चेयरमैन मेडिकल के. परमशिवम ने कहा कि पहले एआईएडीएमके सरकार के दौरान ‘कुदिमरमथु’ योजना के तहत नहरों के रखरखाव का काम किया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली डीएमके सरकार के शुरुआती चार वर्षों में ऐसे कामों के लिए फंड नहीं दिया गया था। किसानों की बार-बार की मांगों के बाद पिछले साल नहरों की सफाई के लिए 10 करोड़ रुपए मंजूर किए गए थे।

अब इन संगठनों ने 229 कामों के लिए प्रस्ताव सौंपे हैं, जिनका अनुमानित खर्च 14.98 करोड़ रुपए है। किसान प्रतिनिधियों ने जल्द मंजूरी पाने के लिए सरकार के तीन मंत्रियों से भी संपर्क किया है, जिनमें वित्त और जल संसाधन मंत्री और तिरुप्पुर जिले के प्रभारी मंत्री शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि फंड जारी करने का भरोसा तो दिया गया था, लेकिन अभी भी आवंटन का इंतजार है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून से पर्याप्त बारिश न होने के कारण किसानों को डर है कि नहरों की सफाई में देरी होने से जलाशयों से छोड़े जाने वाले पानी का असर कम हो सकता है।

जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रस्ताव वित्त विभाग को भेज दिया गया है और उस पर मंजूरी का इंतजार है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही फंड मंजूर हो जाएगा, जिसके बाद नहरों की मरम्मत का काम शुरू हो सकेगा।