नई दिल्ली, 26 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री पद को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि देश का प्रधानमंत्री युवा होना चाहिए। उनके इस बयान पर रविवार को अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी।नेताओं ने कहा कि भारत में प्रधानमंत्री का फैसला उम्र नहीं, बल्कि जनता करती है।
शनिवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा, “भारत की 50 प्रतिशत आबादी 25 साल से कम उम्र की है। हमारी कोशिश होगी कि आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हमारी पार्टी युवाओं को उम्मीदवार बनाए, ताकि वे आपकी आवाज बेखौफ होकर उठा सकें।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारी कोशिश होगी कि 2029 के चुनाव में भारत का प्रधानमंत्री 80 साल का व्यक्ति नहीं, बल्कि 40 या 45 साल का युवा बने। यही हमारा प्रयास रहेगा।”
ओवैसी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि उन्हें उम्र की इतनी चिंता क्यों है। अमेरिका के राष्ट्रपति की उम्र 80 साल से ज्यादा है और वह आज भी दुनिया की राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। मुझे लगता है कि ओवैसी एक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वह हमेशा मुस्लिमों और तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं।”
उन्होंने आईएएनएस से कहा, “हमें गर्व है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है।”
भाजपा नेता आरपी सिंह ने ओवैसी और अन्य विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाया कि वे “युवाओं के कंधों पर बंदूक रखकर राजनीति करना चाहते हैं।”
उन्होंने कहा, “जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी देश के छात्रों और युवाओं की चिंता करते हैं, वैसा अब तक किसी भी प्रधानमंत्री ने नहीं किया।”
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां 80 साल का व्यक्ति भी चुनाव लड़ सकता है और युवा भी। उन्होंने आईएएनएस से कहा, “लोकतंत्र में जीतने वाली पार्टी अपना नेता चुनती है। वे जिसे चाहें, उसे चुन सकते हैं। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है। आखिरकार प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि देश की जनता करती है।”
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि वह देश निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। लोगों की अपनी-अपनी राय हो सकती है, लेकिन हमारा संघर्ष और हमारा रास्ता अलग है।

