चीनी जेल में बंद पत्रकार की बिगड़ती सेहत पर प्रेस फ्रीडम ग्रुप ने जताई चिंता

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पेरिस, 5 मई (आईएएनएस)। एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय प्रेस फ्रीडम संगठन ने चीनी पत्रकार डोंग युयु की बिगड़ती सेहत पर गहरी चिंता जताई है। उनके परिवार ने बताया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया तो पता चला कि उन्हें एक ट्यूमर है।

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से अपील की कि वे बीजिंग पर दबाव डालें ताकि मेडिकल पैरोल पर उनकी रिहाई पक्की हो सके और उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने और अपने परिवार से मिलने की इजाजत मिल सके।

संगठन ने पत्रकार के परिजनों का हवाला देते हुए कहा कि डोंग युयु को 28 अप्रैल को चीन के तियानजिन शहर में जेल से जुड़े एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां एक कंप्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन में कथित तौर पर “उनके बाएं फेफड़े के निचले हिस्से में एक बड़ा ट्यूमर” दिखा, जिसका नेचर पता लगाने के लिए और कंट्रास्ट-एन्हांस्ड इमेजिंग की जरूरत है।

आरएसएफ ने बताया कि मेडिकल जांच में एरिथमिया भी सामने आया, जिसमें समय से पहले एट्रियल कॉन्ट्रैक्शन और समय से पहले वेंट्रिकुलर कॉन्ट्रैक्शन (हृदय की अतिरिक्त या समय से पहले होने वाली धड़कनें जो सामान्य हृदय लय को बाधित करती हैं) शामिल हैं। उन्हें आगे की जांच के लिए 24 घंटे के होल्टर मॉनिटर (एक छोटा पहनने योग्य उपकरण) पर रखा गया है, लेकिन नतीजे अभी तक उनके परिवार को नहीं बताए गए हैं।

आरएसएफ ने उनके परिवार के हवाले से कहा, “पिछले चार सालों में गलत तरीके से हिरासत में रखे जाने के मुश्किल हालात ने युयु की सेहत पर बहुत बुरा असर डाला है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि मेडिकल आधार पर उन्हें तुरंत रिहा कर दिया जाएगा ताकि युयु को जरूरी इलाज मिल सके।”

चीन में जेलों की बिगड़ती हालत पर रोशनी डालते हुए, आरएसएफ एशिया पैसिफिक की एडवोकेसी मैनेजर एलेक्जेंड्रा बिएलाकोव्स्का ने कहा, “हम डोंग युयु की सेहत को लेकर बहुत परेशान हैं। चीन की जेलें अपनी खराब हालत, स्वतंत्र और अच्छी क्वालिटी की मेडिकल केयर की कमी और कैदियों की भलाई पर ध्यान न देने के लिए बदनाम हैं।”

आरएसएफ के मुताबिक, नवंबर 2024 में, डोंग युयु को दो साल प्री-ट्रायल हिरासत में बिताने के बाद सात साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

चीन के सरकारी मीडिया में उन्हें एक बहुत कम मिलने वाली आजाद आवाज बताते हुए, संगठन ने कहा कि उन्होंने 35 साल कड़े कंट्रोल वाले सरकारी अखबार गुआंगमिंग डेली के लिए काम किया, जहां उन्होंने मानवाधिकारों के मुद्दों और सत्ता के गलत इस्तेमाल पर लगातार रिपोर्ट की।

आरएसएफ ने कहा कि चीन की जेलें बदनाम हैं और “गंदगी और पारदर्शिता की कमी” से जूझ रही हैं। यहां कई गलत काम होते हैं; हिरासत में लिए गए पत्रकारों को अक्सर यातना और बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ता है और उन्हें अकसर मेडिकल केयर से मना किया जाता है।

ग्रुप ने कुछ उदाहरण भी दिए। बताया कि, ‘चीनी पत्रकार झांग झान को जेल में बेड़ियों में जकड़ा गया और जबरदस्ती खाना खिलाया गया; चीन में ‘मी टू’ शुरू करने वाली पत्रकार सोफिया हुआंग ज़ुएकिन को “टाइगर चेयर” पर बिठाया गया, जबकि पॉलिटिकल कमेंटेटर यांग हेंगजुन को हिरासत में गलत बर्ताव और यातना का सामना करना पड़ा।’

इसमें आगे कहा गया, “नोबेल शांति पुरस्कार विजेता लियू शियाओबो और ब्लॉगर यांग टोंगयान, दोनों की जेल में इलाज न होने पर कैंसर से मौत हो गई, जबकि विदेशी मीडिया के लिए तिब्बत से जुड़ी खबर मुहैया कराने वाले कुंचोक जिनपा की मौत हिरासत में हुई।”

आरएसएफ ने बताया कि “चीन, पत्रकारों और प्रेस की आजादी के लिए लड़ने वालों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी जेल है,” जहां “अभी कम से कम 120 मीडिया वर्कर सलाखों के पीछे हैं,” 2026 आरएसएफ वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स की 180 देशों की लिस्ट में चीन 178वें स्थान पर है।