Monday, June 29, 2026
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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2026 के लिए वित्त मंत्री को सौंपा 9,400 करोड़ रुपए से ज्यादा का डिविडेंड

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नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने सोमवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को 9,400 करोड़ रुपए से अधिक के डिविडेंड के चेक सौंपे।

इन बैंकों में बैंक ऑफ बड़ौदा ने सबसे अधिक 2,811 करोड़ रुपए का डिविडेंड चेक वित्त मंत्री को सौंपा। यह डिविडेंड 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए दिया गया है। बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. देबदत्त चंद ने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव संजय लोहिया और बैंक के कार्यकारी निदेशकों की मौजूदगी में यह चेक वित्त मंत्री को सौंपा।

यह डिविडेंड ऐसे समय में दिया गया है जब बैंक ऑफ बड़ौदा ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे अधिक 20,021 करोड़ रुपए का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) दर्ज किया। यह पहला अवसर है जब बैंक का वार्षिक मुनाफा 20,000 करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गया।

इसके अलावा, 31 मार्च 2026 तक बैंक का कुल वैश्विक कारोबार भी 30 लाख करोड़ रुपए के स्तर से ऊपर पहुंच गया।

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा ने प्रति शेयर 8.50 रुपए का डिविडेंड घोषित किया है, जो 2 रुपए अंकित मूल्य वाले प्रत्येक शेयर पर 425 प्रतिशत के बराबर है।

इसके अलावा, पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की ओर से भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को 2,416 करोड़ रुपए का डिविडेंड चेक सौंपा गया।

यह चेक बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अशोक चंद्र ने वित्त मंत्री को प्रदान किया।

इसके साथ ही, केनरा बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2,397 करोड़ रुपए का डिविडेंड चेक वित्त मंत्री को सौंपा। यह चेक बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ बृजेश कुमार सिंह ने दिया।

वहीं, इंडियन बैंक ने भी सरकार को डिविडेंड का भुगतान किया। बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ बिनोद कुमार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1,815 करोड़ रुपए का डिविडेंड चेक वित्त मंत्री को सौंपा।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ओर से यह डिविडेंड ऐसे समय में दिया गया है जब पिछले वित्त वर्ष में इन बैंकों ने मजबूत मुनाफा, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता (एसेट क्वालिटी) और मजबूत बैलेंस शीट का प्रदर्शन किया।

इसी मजबूत वित्तीय स्थिति के चलते बैंक सरकार को अधिक डिविडेंड देने में सक्षम हुए हैं। केंद्र सरकार इन सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सबसे बड़ी शेयरधारक है।