Friday, June 5, 2026
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जेलेंस्की का पत्र पढ़ चुके हैं पुतिन, पश्चिमी देशों से बातचीत के लिए तैयार: क्रेमलिन

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मॉस्को, 5 जून (आईएएनएस)। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की द्वारा भेजा गया खुला पत्र प्राप्त कर उसे पढ़ लिया है। यह जानकारी क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दी।

रूस की सरकारी समाचार एजेंसी टीएएस समाचार एजेंसी के अनुसार, पेसकोव ने सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच के दौरान एक साक्षात्कार में बताया कि राष्ट्रपति पुतिन को जेलेंस्की के पत्र और उस पर विभिन्न विश्व नेताओं की प्रतिक्रियाओं की भी जानकारी दी गई है।

अपने खुले पत्र में जेलेंस्की ने रूस-यूक्रेन युद्ध को सीधे संवाद के जरिए समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा, “यूक्रेन हमारे और आपके बीच सीधे संवाद के माध्यम से इस युद्ध को समाप्त करना चाहता है। मैं एक बैठक का प्रस्ताव रखता हूं।”

जेलेंस्की ने सुझाव दिया कि इस तरह की वार्ता की मेजबानी स्विट्ज़रलैंड, तुर्किए या अरब देशों में से कोई देश कर सकता है। उन्होंने बैठक की एक स्पष्ट तिथि तय करने और बातचीत की अवधि के दौरान पूर्ण युद्धविराम लागू करने की भी पेशकश की।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि वास्तविक और पूर्ण युद्धविराम ही सार्थक बातचीत की शुरुआत का सबसे अच्छा तरीका हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रम इस बात को और महत्वपूर्ण बनाते हैं।

क्रेमलिन प्रवक्ता पेसकोव ने कहा कि रूस अब भी वार्ता प्रक्रिया फिर से शुरू करने की उम्मीद रखता है। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि मौजूदा गतिरोध अंततः टूटेगा और संवाद के नए प्रयास शुरू होंगे। हम अभी भी मौजूदा माध्यमों के जरिए अमेरिकी पक्ष के साथ संपर्क में हैं।”

पेसकोव ने यह भी कहा कि रूस बातचीत से पीछे नहीं हट रहा है और राष्ट्रपति पुतिन संवाद के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “यदि यूरोपीय देश रूस के साथ संवाद न करने की अपनी नीति छोड़ दें, तो उन्हें केवल फोन उठाकर बातचीत शुरू करनी होगी।”

हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यूक्रेन संघर्ष बेहद जटिल है और इसका समाधान आसानी से नहीं निकलेगा।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर दुनिया की नजर बनी हुई है। ऐसे समय में जेलेंस्की के सीधे संवाद के प्रस्ताव और पुतिन की बातचीत के प्रति कथित तत्परता को संभावित कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।